Indian VCs का बड़ा फैसला: अब 'वैल्यूएशन' नहीं, 'वैल्यू' पर दांव! AI के बढ़ते असर से बदली चाल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian VCs का बड़ा फैसला: अब 'वैल्यूएशन' नहीं, 'वैल्यू' पर दांव! AI के बढ़ते असर से बदली चाल
Overview

भारतीय वेंचर कैपिटलिस्ट्स (VCs) अपने निवेश के तरीके को बदल रहे हैं। अब ऊंचे वैल्यूएशन (Valuation) पर फोकस करने के बजाय, वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण लंबी अवधि की वैल्यू क्रिएशन (Value Creation) को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब FY26 में ओवरऑल फंडिंग में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन अर्ली-स्टेज और AI/डीप टेक जैसे क्षेत्रों में अच्छी ग्रोथ दिख रही है।

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AI कैसे वैल्यू बना रहा है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब एक मुख्य टूल बन गया है जो स्टार्टअप्स के काम करने और बढ़ने के तरीके को बदल रहा है। AI-नेटिव कंपनियां छोटे टीमों और तेज एग्जीक्यूशन (Execution) के साथ ज्यादा एफिशिएंट (Efficient) बन रही हैं, ठीक वैसे ही जैसे इंटरनेट और मोबाइल फोन ने दुनिया बदली थी। यह टेक वेव (Tech Wave) लागत कम कर रही है और पैसों के इस्तेमाल की एफिशिएंसी (Unit Economics) को बेहतर बना रही है, जिससे नए कंपनियों के लिए भी मुनाफा और स्पष्ट रिटर्न (Return) हासिल करना आसान हो गया है। नतीजतन, निवेशक तेजी से ग्रोथ पर सिर्फ ध्यान देने वालों की बजाय AI का इस्तेमाल करके टिकाऊ, स्केलेबल (Scalable) बिजनेस बनाने वाले फाउंडर्स (Founders) को तरजीह दे रहे हैं। फोकस 2021 के पिछले फंडिंग राउंड्स पर नहीं, बल्कि 2035 तक के भविष्य की संभावनाओं पर है। 2020 में 5% से कम AI का हिस्सा अब 2025 में बढ़कर लगभग 12.3% तक पहुंच गया है।

नए सेक्टर्स और सरकारी मदद

AI के अलावा, भारत के स्टार्टअप्स अब डीप टेक्नोलॉजी (Deep Technology) वाले क्षेत्रों पर भी तेजी से फोकस कर रहे हैं। सेमीकंडक्टर्स (Semiconductors), स्पेस टेक्नोलॉजी (Space Technology), प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग (Precision Manufacturing) और एडवांस्ड रोबोटिक्स (Advanced Robotics) जैसे सेक्टर नए व्यवसायों के लिए मुख्य क्षेत्र बन रहे हैं। यह भारत को ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर (Global Technology Leader) बनाने के सरकारी लक्ष्यों के अनुरूप है। स्टार्टअप इंडिया (Startup India) जैसे मददगार सरकारी नियमों, आसान अनुपालन (Compliance) और क्रेडिट गारंटी (Credit Guarantee) में वृद्धि से इन मांग वाले वेंचर्स के लिए बेहतर माहौल बन रहा है। एंजेल टैक्स (Angel Tax) को हटाना और टैक्स हॉलिडे (Tax Holiday) को बढ़ाना जैसे बदलाव, खासकर डीप-टेक कंपनियों के लिए, जो इनोवेशन (Innovation) में अधिक समय लेती हैं, अधिक घरेलू फंडिंग लाने और लॉन्ग-टर्म निवेश का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। भारतीय IT सर्विसेज सेक्टर भी AI के डर से दबाव में होने के बावजूद, AI के कारण नए ग्रोथ के अवसर तलाश रहा है।

चुनौतियां और जोखिम

सकारात्मक रुझानों के बावजूद, महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। FY26 में कुल फंडिंग वॉल्यूम 18% घटकर $11.7 बिलियन रह गई, और डील वॉल्यूम 34% गिर गया। निवेशक अब ज्यादा सेलेक्टिव (Selective) हो गए हैं, कम और बड़ी डील्स (Deals) को बैक कर रहे हैं। तेजी से बदलते बाजारों में विफलता की दर (Failure Rate) अधिक होने के कारण, पूंजी टॉप परफॉर्मर्स (Top Performers) पर केंद्रित हो रही है, जिससे शुरुआती चरण की कंपनियों के लिए फंडिंग हासिल करना मुश्किल हो सकता है। AI और डीप टेक में स्पेशलाइज्ड टैलेंट (Specialized Talent) की कमी एक स्थायी समस्या है, साथ ही बड़े शहरों के बाहर इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) की कमी भी है। AI प्लेटफॉर्म्स पर बनने वाले स्टार्टअप्स को उन प्लेटफॉर्म्स से ही प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिससे लॉन्ग-टर्म वैल्यू और निर्भरता पर सवाल उठते हैं। $50 बिलियन या $100 बिलियन की ग्लोबल कंपनियां बनाने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन मजबूत इनोवेशन, अच्छी मैनेजमेंट (Management) और प्रभावी एग्जीक्यूशन के बिना मुश्किल है। Nifty IT इंडेक्स 2025 में अब तक 25% गिर चुका है, जो व्यापक आर्थिक अनिश्चितता और GenAI डिसरप्शन (Disruption) के डर को दर्शाता है। यह संकेत देता है कि पारंपरिक IT सर्विसेज को जल्दी से अनुकूलित (Adapt) करना होगा या आगे भी वैल्यूएशन में गिरावट का सामना करना पड़ेगा।

आगे का नज़रिया और ग्रोथ

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम (Ecosystem) में परिपक्वता (Maturity) के स्पष्ट संकेत दिख रहे हैं। भारत पर फोकस करने वाले VCs के एक सर्वे में पाया गया कि 74% को 2026 में मार्केट कंडीशंस (Market Conditions) में सुधार की उम्मीद है, जिसमें AI/ML और डीप टेक प्रमुख निवेश फोकस हैं। अर्ली-स्टेज इन्वेस्टिंग (Early-stage Investing) मजबूत बनी हुई है, जो पब्लिक मार्केट के उतार-चढ़ाव से अप्रभावित है। वैल्यूएशन अब कंपनियों की टिकाऊ बिजनेस बनाने की क्षमता के आधार पर तय हो रहे हैं। 31 मार्च 2026 तक भारत में 2.23 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं, जिन्होंने 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा की हैं। फोकस अब त्वरित वैल्यूएशन लाभ से हटकर इनोवेशन, रेसिलिएंस (Resilience) और लॉन्ग-टर्म वैल्यू के स्थायी प्रभाव पर चला गया है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण कंपनियां बनाने के लिए तैयार कर रहा है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.