भारत का स्टार्टअप बाजार अब 'हाइपर-ग्रोथ' से हटकर 'प्रॉफिटेबिलिटी' पर ध्यान दे रहा है। 2024 के बाद से **10** से ज्यादा कंपनियों ने अपना यूनिकॉर्न (Unicorn) स्टेटस खो दिया है। Slice और Unacademy जैसे बड़े नाम 2021 के अपने पीक से काफी नीचे आ गए हैं, क्योंकि निवेशक अब ग्रोथ के बजाय फंडामेंटल्स देख रहे हैं।
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में साल 2026 एक बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। आसान कैपिटल का दौर खत्म हो चुका है और अब कंपनियां मुनाफे की राह तलाश रही हैं। 2024 से अब तक 10 से 16 स्टार्टअप्स ने अपना 'यूनिकॉर्न' दर्जा खो दिया है, यानी इनकी वैल्यूएशन $1 बिलियन से नीचे आ गई है।
Slice और Unacademy की हालत
इसका सबसे बड़ा उदाहरण फिनटेक फर्म Slice है। कभी $1.4 बिलियन की वैल्यूएशन वाली इस कंपनी ने अब $100 मिलियन की फंडिंग जुटाई है, लेकिन इसकी वैल्यूएशन घटकर $450 से $470 मिलियन रह गई है। यह 2022 के पीक से करीब 70% की गिरावट है।
वहीं, एडटेक सेक्टर की दिग्गज कंपनी Unacademy को भी तगड़ा झटका लगा है। हाल ही में upGrad ने इसे $200 मिलियन से कुछ अधिक में अधिग्रहित (Acquire) किया है, जो 2021 की $3.4 बिलियन की वैल्यूएशन से 94% कम है।
क्यों हो रहा है ऐसा?
इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
- ग्लोबल शिफ्ट: ग्लोबल कैपिटल अब अमेरिका और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सेक्टर की तरफ रुख कर रहा है।
- फंडिंग का अकाल: जो स्टार्टअप्स 'AI-नेटिव' नहीं हैं, उनके लिए नया फंड जुटाना मुश्किल हो गया है।
- मुनाफे पर जोर: निवेशक अब कागजी वैल्यूएशन के बजाय कंपनी के असल मुनाफे को परख रहे हैं।
हालांकि, सब कुछ निराशाजनक नहीं है। 2026 की ASK Private Wealth Hurun India 'Cheetah' इंडेक्स के अनुसार, ऐसी कंपनियां जिनकी वैल्यू $200 से $500 मिलियन के बीच है, उनकी संख्या पिछले 5 सालों में दोगुनी होकर 110 हो गई है। इसका मतलब है कि EV, डीपटेक और AI जैसे सेक्टर में नया पाइपलाइन तैयार हो रहा है, बस अब कंपनियों को अपना फाइनेंशियल मॉडल मजबूत करना होगा।
