Indian Startup Funding: स्टार्टअप्स की फंडिंग में आई भारी गिरावट, अक्टूबर में **47%** लुढ़का निवेश

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Startup Funding: स्टार्टअप्स की फंडिंग में आई भारी गिरावट, अक्टूबर में **47%** लुढ़का निवेश

अक्टूबर 2026 में भारतीय स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग का माहौल काफी सुस्त रहा। इस दौरान स्टार्टअप्स ने सिर्फ **$678 मिलियन** जुटाए, जो सितंबर के मुकाबले **47.5%** कम है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स का पूरा ध्यान अब US-आधारित AI और टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर शिफ्ट हो गया है।

फंडिंग में क्यों आई सुस्ती?

अक्टूबर के आंकड़ों में सबसे बड़ी गिरावट का मुख्य कारण $100 मिलियन से बड़े किसी भी मेगा-डील का न होना है। आमतौर पर यही बड़े सौदे कुल फंडिंग के आंकड़ों को सपोर्ट करते हैं। वेंचर कैपिटल मार्केट अब काफी सेलेक्टिव हो गया है और ग्लोबल स्तर पर इंस्टीट्यूशनल पैसा अब भारत जैसे उभरते बाजारों के बजाय अमेरिका में AI इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्थापित टेक दिग्गजों की ओर ज्यादा जा रहा है।

अब मुनाफा है प्राथमिकता

इन्वेस्टर्स अब उन कंपनियों को तरजीह दे रहे हैं जो सिर्फ यूजर बेस बढ़ाने के बजाय प्रॉफिटेबिलिटी और बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स पर फोकस कर रही हैं। जो स्टार्टअप्स अपने ऑपरेशंस के लिए बार-बार बड़े फंडिंग राउंड्स पर निर्भर थे, उनके लिए अब राह चुनौतीपूर्ण हो गई है। बाजार में अब ऐसी कंपनियों को तरजीह मिल रही है जिनके बिजनेस मॉडल साबित हो चुके हैं।

SEBI का नया कदम

इस बीच, SEBI ने घरेलू स्तर पर प्राइवेट कैपिटल पूल को गहरा करने के लिए 'एक्र्रेडिटेड इन्वेस्टर' (Accredited Investor) फ्रेमवर्क में बदलाव किए हैं। इसमें ₹5 करोड़ का सिक्योरिटीज-मार्केट एक्सपोजर रूट और मैनेजर-लेड एक्रेडिटेशन शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स की विदेशी पूंजी पर निर्भरता को कम करना है, लेकिन इसका असर दिखने में अभी समय लगेगा।

आने वाले समय में निवेशकों की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या घरेलू कैपिटल फ्लो विदेशी निवेश की कमी को पूरा कर पाएगा, या भारतीय स्टार्टअप्स अमेरिकी ब्याज दरों और ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक बदलावों के प्रति इसी तरह संवेदनशील बने रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.