अक्टूबर 2026 में भारतीय स्टार्टअप्स के लिए निवेश का माहौल ठंडा रहा है। फंडिंग में सालाना आधार पर **51%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि निवेशक अब बड़े लेट-स्टेज राउंड्स के बजाय अर्ली-स्टेज कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं।
भारतीय स्टार्टअप्स के लिए अक्टूबर का महीना काफी सुस्त रहा। निवेश का कुल आंकड़ा $694 मिलियन पर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 51% कम है। इतना ही नहीं, सितंबर 2026 की तुलना में भी इसमें 23% की गिरावट देखी गई है, जो मार्केट में बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है।
अर्ली-स्टेज पर निवेशकों का जोर
इकोसिस्टम में निवेश का रुख बदला है। कुल डील वॉल्यूम में अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स का दबदबा रहा, जिन्होंने करीब 62% हिस्सेदारी हासिल की। इसके विपरीत, लेट-स्टेज कंपनियां, जिन्हें बड़े फंड की दरकार होती है, वे कुल निवेश का 20% से भी कम जुटा पाईं। निवेशक अब बड़ी और मैच्योर कंपनियों के बजाय नई और हाई-ग्रोथ वाली कंपनियों को चुनना पसंद कर रहे हैं।
हेल्थकेयर और टेक सेक्टर में चमक
फंडिंग में गिरावट के बावजूद कुछ चुनिंदा सेक्टरों में निवेश आता रहा। हेल्थकेयर सेक्टर इस बार सबसे आगे रहा, जिसमें Even Healthcare ने $50 मिलियन जुटाए। इसके अलावा Boldfit ने $41.5 मिलियन, Baba Care ने $40 मिलियन और GreenCell Mobility ने $34.5 मिलियन का फंड हासिल किया।
वहीं, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Simplismart ने Nvidia के सहयोग से $14 मिलियन जुटाए। यह साफ संकेत है कि निवेशक अब उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनके पास मजबूत टेक्नोलॉजी या जरूरी सेवाएं हैं, न कि ऐसी कंपनियों को जो सिर्फ कस्टमर बढ़ाने के लिए भारी कैश जला रही हैं।
आगे क्या उम्मीद करें?
फंडिंग में आई यह कमी इशारा है कि अब एग्रेसिव ग्रोथ का दौर बीत चुका है और फोकस सस्टेनेबिलिटी पर है। स्टार्टअप्स के लिए अब बड़े राउंड्स क्लोज करना चुनौतीपूर्ण है, जिससे उन कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है जिनके पास कैश कम है। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनियां अपना ऑपरेशनल खर्च कैसे मैनेज करती हैं।
