साल 2025 में भारतीय स्टार्टअप्स के लिए IPOs (Initial Public Offerings) से निवेशकों को $2 अरब से ज्यादा की रकम वापस मिली। यह बड़ी बात इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ समय से प्राइवेट फंडिंग में कमी आई है, जिससे VCs के लिए अपने निवेश से बाहर निकलना (exit) थोड़ा मुश्किल हो गया था। हालांकि, इस रिपोर्ट का सच यह है कि यह $2 अरब की कमाई कुछ चुनिंदा बड़े IPOs के कारण ही संभव हो पाई।
कुछ बड़े सौदों ने चटकी सारी बाजी
Bain & Company और IVCA India की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में VCs को IPOs से कुल $2 अरब के आसपास का एग्जिट मिला। लेकिन, एक चौंकाने वाली बात सामने आई है: $100 मिलियन (लगभग ₹830 करोड़) से बड़े IPOs ने ही कुल VC एग्जिट वैल्यू का लगभग 90% हिस्सा समेटा। यह पिछले साल (2024) के 70% के मुकाबले काफी ज्यादा है। इसका सीधा मतलब है कि सिर्फ उन्हीं कंपनियों को IPO बाजार में बड़ी सफलता मिली, जिनका साइज बड़ा था और जिनका मार्केट में मजबूत दबदबा था।
भारत का रिकॉर्ड IPO मार्केट बनाम VC एग्जिट वैल्यू
दुनिया भर में 2025 IPOs के लिए एक मजबूत साल रहा, जिसमें कुल $143.3 अरब की रकम जुटाई गई। भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहा, जहां मुख्य बोर्ड IPOs ने ₹1.75 लाख करोड़ (लगभग $21 अरब) का रिकॉर्ड बनाया। लेकिन VCs के लिए एग्जिट का आंकड़ा उतना उत्साहजनक नहीं था; यह पिछले साल के करीब $7 अरब पर ही टिका रहा। इस रकम में भी भारी असमानता थी: सिर्फ 8 बड़े IPOs ने भारत के प्राइमरी मार्केट में जुटाई गई कुल रकम का लगभग 44.5% हिस्सा हासिल किया। VCs के लिए लिक्विडिटी (पैसे की वापसी) में Groww (करीब $670 मिलियन), Lenskart (लगभग $475 मिलियन), और Dr Agarwal’s Healthcare (लगभग $255 मिलियन) जैसी कंपनियों ने अहम भूमिका निभाई।
ग्लोबल ट्रेंड्स और बदलते सेक्टर का प्रदर्शन
वैश्विक स्तर पर, 2025 में गिरती ब्याज दरें और आसान मॉनेटरी पॉलिसी के चलते IPOs में तेजी देखी गई। इससे कंपनियों के वैल्यूएशन बढ़े और उधार लेने की लागत कम हुई। वहीं, भारत में घरेलू शेयर बाजार ने मामूली बढ़त (Nifty 50 करीब 10.6% ऊपर) दर्ज की, लेकिन यह वैश्विक बाजारों से पिछड़ गया। इसकी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपया रहा। टेक्नोलॉजी सेक्टर, जो आमतौर पर IPOs का बड़ा स्रोत होता है, उसके लिए साल खराब रहा। Nifty IT इंडेक्स 2025 में 10% से ज्यादा गिरा। इसके विपरीत, PSU Banks और Metals जैसे सेक्टरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। VCs पिछले वर्षों की ऊंची ब्याज दरों के कारण अधिक सतर्क हो गए थे, और उन्होंने प्रॉफिटेबिलिटी (लाभप्रदता) और स्केल (पैमाने) पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया, जिसने 2025 के IPO मार्केट को प्रभावित किया।
स्टार्टअप एग्जिट के रास्तों पर बढ़ी चिंता
2025 में VC एग्जिट वैल्यू का कुछ ही IPOs में सिमट जाना वेंचर कैपिटल इंडस्ट्री के लिए बड़ी चिंता का विषय है। कुछ मेगा-IPOs पर निर्भरता का मतलब है कि ज्यादातर स्टार्टअप्स के लिए अपने निवेश से बाहर निकलने के अनुमानित और दोहराए जाने वाले रास्ते कम हो गए हैं। प्राइवेट फंडिंग में भी काफी कमी आई है, जिसमें 2025 की पहली छमाही में भारत में लेट-स्टेज फंडिंग 27%गिरी। ऐसे में VCs पर निवेश से पैसा निकालने का दबाव बढ़ गया है। यह मार्केट डायनामिक्स मिड-साइज़ कंपनियों और उन फर्मों के लिए नुकसानदायक है जो अपनी कैटेगरी में लीडर नहीं हैं, क्योंकि उनके पब्लिक लिस्टिंग के मौके कम हो जाते हैं। स्केल, लीडरशिप और प्रॉफिटेबिलिटी को तरजीह देने वाला यह बाजार उन कंपनियों को मुश्किल में डाल सकता है जिनमें ये खूबियां नहीं हैं। इसका नतीजा यह हो सकता है कि VCs अपने निवेश को लंबे समय तक होल्ड करें और उन्हें कम वैल्यूएशन मिले। IT सेक्टर का खराब प्रदर्शन इस जोखिम को दिखाता है कि अगर कुछ बड़ी लिस्टिंग्स लड़खड़ाती हैं तो क्या हो सकता है। 2025 के कई IPOs में फ्रेश कैपिटल रेज (नई पूंजी जुटाना) की बजाय ऑफर फॉर सेल (OFS) ज्यादा था, जो बताता है कि लिस्टिंग अब कंपनी की ग्रोथ के लिए फंड जुटाने के बजाय शुरुआती निवेशकों को पैसा वापस दिलाने पर ज्यादा केंद्रित हो रही है।
2026 का आउटलुक: जारी रहेगी गतिविधि, पर चुनिंदापन भी
विश्लेषकों का 2026 के लिए भारतीय IPO मार्केट को लेकर भरोसा मिला-जुला है। उन्हें उम्मीद है कि अच्छी कंपनियों की लिस्ट में होने के कारण बाजार में अच्छी खासी गतिविधि बनी रहेगी। हालांकि, 2025 के अंत में लिस्टिंग से मिले कमजोर मुनाफे को देखते हुए, अब कंपनियों के फंडामेंटल्स और वैल्यूएशन पर ज्यादा ध्यान देने की उम्मीद है। ऐसे में, भले ही बाजार सक्रिय रहे, निवेशक शायद वैल्यू और स्थिरता को प्राथमिकता देंगे। इसका मतलब है कि नई वेंचर्स को अभी भी केंद्रित एग्जिट्स के साथ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।