Scrubsy की ₹27 करोड़ की फंडिंग: D2C स्टार्टअप्स में लौटी निवेशकों की रुचि!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Scrubsy की ₹27 करोड़ की फंडिंग: D2C स्टार्टअप्स में लौटी निवेशकों की रुचि!

भारत में डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) सेक्टर में एक बार फिर से पैसों की गर्मी लौट आई है। होम-क्लीनिंग स्टार्टअप Scrubsy ने V3 Ventures से ₹27 करोड़ जुटाए हैं। वहीं, The Souled Store और Nat Habit जैसे ब्रांड भी नए फंड की तलाश में हैं। निवेशकों का फोकस अब तेज़ी से विस्तार के बजाय मुनाफे और टिकाऊ ग्रोथ पर है।

D2C सेक्टर में फिर दिखी तेजी

भारत का डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) बाजार एक बार फिर से निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। पहले जहां कंपनियां सिर्फ ग्रोथ पर ध्यान दे रही थीं, वहीं अब मुनाफे और मजबूत यूनिट इकोनॉमिक्स वाली कंपनियों की तरफ निवेशक बढ़ रहे हैं।

Scrubsy ने जुटाए ₹27 करोड़

इसी ट्रेंड के बीच, होम-क्लीनिंग स्टार्टअप Scrubsy ने V3 Ventures के नेतृत्व में ₹27 करोड़ की फंडिंग हासिल की है। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपनी इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने में करेगी। यह कदम सप्लाई चेन पर कंपनी के कंट्रोल को मजबूत करने का संकेत देता है।

The Souled Store IPO की तैयारी में?

पॉप-कल्चर अपैरल ब्रांड The Souled Store, प्री-IPO राउंड के तहत ₹300-400 करोड़ जुटाने पर विचार कर रही है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि वह अभी कैश फ्लो पॉजिटिव है और जल्दबाजी में फंड जुटाने की जरूरत नहीं है। कंपनी का लक्ष्य अगले 12 से 18 महीनों में IPO लाना है। यह दिखाता है कि स्टार्टअप्स अब ग्रोथ और वित्तीय सेहत के बीच संतुलन बना रहे हैं।

अन्य स्टार्टअप्स की भी नजर फंड पर

Haus & Kinder (बच्चों और घर के सामान) जैसे ब्रांड ₹150 करोड़ और स्किनकेयर ब्रांड Nat Habit भी करीब ₹150 करोड़ जुटाने के लिए निवेशकों से बात कर रहे हैं। ये कंपनियां ऐसे बाजार में हैं जहां निवेशक उन ब्रांड्स को प्राथमिकता दे रहे हैं जो ग्राहक को बनाए रखने और कम लागत में नए ग्राहक जोड़ने में सफल हैं।

D2C की राह में चुनौतियां

D2C सेक्टर का विकास बदलते कंज्यूमर ट्रेंड्स और डिजिटल कॉमर्स के बढ़ने से हो रहा है। हालांकि, इस रास्ते में कई चुनौतियां भी हैं। यह एक बेहद कॉम्पिटिटिव बाजार है, जहां इन स्टार्टअप्स को बड़े FMCG दिग्गजों से मुकाबला करना पड़ता है जिनके पास ज्यादा पैसा और बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क हैं।

निवेशकों के लिए जोखिम

निवेशकों को इस सेक्टर में जोखिमों से भी आगाह रहना चाहिए। मार्केटिंग और इन्वेंट्री के लिए भारी पूंजी की जरूरत, तेजी से स्केल करने का दबाव, और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भरता, ये सभी फैक्टर्स कंपनी के कैश रिजर्व पर असर डाल सकते हैं। अगर कोई कंपनी अपने बर्न रेट (खर्च करने की दर) को कंट्रोल नहीं कर पाती है, तो उसे लिक्विडिटी की समस्या आ सकती है।

आगे क्या?

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ये स्टार्टअप्स ग्रोथ और मुनाफे के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं। जैसे-जैसे ये कंपनियां पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रही हैं, बाजार उनकी मार्जिन सस्टेन करने और ग्राहक बेस बढ़ाने की क्षमता पर कड़ी नजर रखेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.