Indian D2C Startups: फंडिंग का नया दौर! **$6 बिलियन** का निवेश जुटाया, अब मुनाफा है पहली प्राथमिकता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian D2C Startups: फंडिंग का नया दौर! **$6 बिलियन** का निवेश जुटाया, अब मुनाफा है पहली प्राथमिकता

भारत के D2C सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है। साल **2021** से अब तक **2,000** राउंड्स में **$6 बिलियन** की फंडिंग जुटाई गई है। अब मार्केट का फोकस 'ग्रोथ एट एनी कॉस्ट' से हटकर यूनिट इकोनॉमिक्स और प्रॉफिटेबिलिटी पर आ गया है।

फंडिंग का बदलता गणित

बीते 5 सालों में D2C स्टार्टअप्स के लिए फंड जुटाने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। साल 2022 में फंडिंग का आंकड़ा $1.6 बिलियन के शिखर पर था, जो साल 2024 तक घटकर $824 मिलियन रह गया। हालांकि, 2025 में 9% की रिकवरी के साथ यह $898 मिलियन तक पहुंचा, जो दिखाता है कि बाजार अब अधिक अनुशासित हो गया है।

अब निवेशक बड़ी कंपनियों के बजाय अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स पर दांव लगा रहे हैं। 2025 तक सीड और अर्ली-स्टेज निवेश का कुल फंडिंग में हिस्सा 70% हो गया, जो 2021 में सिर्फ 38% था। वहीं, लेट-स्टेज कैपिटल में 2022 के मुकाबले 69% की गिरावट दर्ज की गई है।

एग्जिट का नया रास्ता

पब्लिक मार्केट्स अब D2C ब्रांड्स के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरे हैं। 2021 से अगस्त 2026 के बीच 15 IPO और 105 अधिग्रहण देखे गए हैं। Lenskart और BlueStone जैसी कंपनियों की सफलता ने रास्ता साफ कर दिया है कि अगर ब्रांड्स स्केल और डिसिप्लिन दिखाते हैं, तो निवेशक उन पर भरोसा करने के लिए तैयार हैं।

बड़े दिग्गजों का दबदबा

मार्केट में कंसोलिडेशन की लहर चल रही है। Hindustan Unilever, Reliance Retail और Wipro Consumer Care जैसी दिग्गज कंपनियां डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स को खरीद रही हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 2025 की शुरुआत में Minimalist का $350 मिलियन में Hindustan Unilever द्वारा अधिग्रहण है।

निवेशकों के लिए सबक

अब खेल 'फंड जुटाने' का नहीं, बल्कि 'यूनिट इकोनॉमिक्स' का है। यानी एक प्रोडक्ट को बेचने पर कंपनी कितना मुनाफा कमा रही है, वही उसकी असली वैल्यू तय करेगा। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि कौन से ब्रांड्स बिना कैश बर्निंग के खुद को मार्केट में बनाए रख सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.