रनवे बढ़ाने से हटकर अब स्ट्रेटेजी का हिस्सा
इंडिया का वेंचर डेट मार्केट तेजी से विकसित हुआ है। यह अब सिर्फ स्टार्टअप्स की रनवे (Runway) बढ़ाने या तुरंत वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि एक अहम स्ट्रेटेजिक फाइनेंशियल टूल बन गया है। आजकल स्टार्टअप्स इसका इस्तेमाल अपने प्लेटफॉर्म को बड़ा करने, महत्वपूर्ण अधिग्रहण करने और अपनी फाइनेंसियल स्ट्रक्चर को मजबूत करने जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए कर रहे हैं। यह दिखाता है कि डेट फाइनेंसिंग अब स्टार्टअप्स की ग्रोथ स्ट्रेटेजी का एक मुख्य हिस्सा बन चुका है।
फाउंडर्स का बढ़ा भरोसा, मार्केट शेयर में भारी इज़ाफा
आजकल फाउंडर्स नॉन-डाइल्यूटिव कैपिटल (Non-dilutive Capital) यानी मालिकाना हक दिए बिना पैसा जुटाने में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं। भारत में कुल वेंचर कैपिटल (VC) के सालाना डिप्लॉयमेंट का लगभग 9% अब वेंचर डेट के जरिए आ रहा है, जो पहले सिर्फ 2-3% हुआ करता था। यह बढ़ोतरी इस बात का सबूत है कि एंटरप्रेन्योर्स इसे अपनी ग्रोथ के लिए फायदेमंद मान रहे हैं, खासकर बिना ओनरशिप (Ownership) दिए। 2018 में जहां यह मार्केट सिर्फ $0.08 बिलियन का था, वहीं 2025 में यह $1.3 बिलियन तक पहुंच गया। डील्स की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई है, जो 2018 में 56 थी, वो 2025 में बढ़कर 187 हो गई।
फिनटेक और दिल्ली-एनसीआर बने फंडिंग के हब
फंडिंग के वितरण (Distribution) की बात करें तो कुछ खास सेक्टर और जगहों पर फोकस बढ़ा है। 2025 में, फिनटेक (Fintech) सेक्टर ने सबसे ज्यादा वेंचर डेट हासिल किया, जिसमें $600 मिलियन की फंडिंग 49 डील्स के जरिए हुई। इसके बाद कंज्यूमर (Consumer) सेक्टर आया, जिसने 60 डील्स में $188 मिलियन जुटाए। वहीं, B2B सेक्टर ने 12 ट्रांजैक्शन्स में $64 मिलियन हासिल किए। भौगोलिक रूप से, दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) सबसे बड़ा हब बनकर उभरा, जहां 64 डील्स में $617 मिलियन का निवेश हुआ। बेंगलुरु (Bengaluru) दूसरे नंबर पर रहा, जिसने 58 डील्स से $333 मिलियन जुटाए, और मुंबई (Mumbai) ने 30 डील्स के जरिए $115 मिलियन हासिल किए। यह कंसंट्रेशन (Concentration) स्थापित स्टार्टअप इकोसिस्टम की मजबूती को दिखाता है।
सीरीज A और B के स्टार्टअप्स की बढ़ी मांग
2025 में वेंचर डेट का सबसे ज्यादा फायदा सीरीज A और सीरीज B के स्टार्टअप्स को मिला। सीरीज A की कंपनियों को 68 डील्स में $303.6 मिलियन मिले, जबकि सीरीज B की कंपनियों ने 45 डील्स के जरिए $356.4 मिलियन जुटाए। यह दिखाता है कि वेंचर डेट मिड-स्टेज ग्रोथ और स्केलिंग (Scaling) के लिए कितना महत्वपूर्ण है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) के करीब हैं या मार्केट में एंट्री के लिए कैपिटल की तलाश में हैं।
ग्रोथ के साथ बढ़ते रिस्क
हालांकि, इस ग्रोथ के साथ कुछ रिस्क भी उभर रहे हैं। फिनटेक और दिल्ली-एनसीआर जैसे कुछ खास सेक्टर और हब्स में कंसंट्रेशन होने से कमजोरियां पैदा होती हैं। कुछ ही हब्स पर ज्यादा निर्भरता सिस्टमैटिक रिस्क (Systematic Risks) पैदा कर सकती है, अगर वे मंदी का सामना करें। विस्तार और अधिग्रहण के लिए वेंचर डेट का इस्तेमाल इस बात की चिंता बढ़ाता है कि कहीं स्टार्टअप्स ज्यादा कर्ज में न डूब जाएं। खराब आर्थिक हालात या फंडिंग की कमी की स्थिति में ज्यादा कर्जदार कंपनियों को परेशानी हो सकती है। वीसी डिप्लॉयमेंट का 9% तक पहुंचना यह संकेत दे सकता है कि ब्याज दरें बढ़ने या निवेशकों के रिस्क लेने की क्षमता घटने पर यह मार्केट कम सुलभ हो सकता है। हालांकि यह नॉन-डाइल्यूटिव है, वेंचर डेट में फिक्स्ड रीपेमेंट ऑब्लिगेशन्स (Fixed repayment obligations) जुड़ जाते हैं, जो मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान शुरुआती स्टेज की फर्म्स पर भारी पड़ सकते हैं। लेंडर्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का मतलब मार्जिन का कम होना और बरोअर्स (Borrowers) के लिए ज्यादा सख्त शर्तें हो सकती हैं। यह सेक्टर आर्थिक मंदी और वीसी उपलब्धता में बदलाव के प्रति संवेदनशील है; वीसी में मंदी से डील फ्लो कम होता है, और बढ़ती दरें डेट को महंगा बनाती हैं। स्ट्राइड वेंचर्स (Stride Ventures) जैसे प्रमुख खिलाड़ी इस डायनामिक मार्केट में काम करते हैं, जहां प्रॉफिटेबिलिटी सावधानीपूर्वक रिस्क मैनेजमेंट और एडैप्टेशन पर निर्भर करती है।
आगे का आउटलुक मजबूत
इंडिया के वेंचर डेट मार्केट के लिए आगे का आउटलुक (Outlook) मजबूत बना हुआ है, और इसमें विस्तार जारी रहने की उम्मीद है। फाउंडर्स द्वारा स्ट्रेटेजिक ग्रोथ के लिए नॉन-डाइल्यूटिव कैपिटल का इस्तेमाल जारी रहने की संभावना है, जिससे फंडिंग में इसकी भूमिका और पक्की होगी। इनोवेशन, नए स्टार्टअप्स और ग्रोथ कैपिटल की मांग जैसे कारक एक पॉजिटिव रास्ता दिखा रहे हैं। भारत की आर्थिक वृद्धि और फ्लेक्सिबल फाइनेंस की जरूरत वाली टेक कंपनियां इस मार्केट को सपोर्ट करेंगी।