Indian Tech Startups: स्टार्टअप्स की चांदी! 9 महीनों में जुटाए **$10.3 बिलियन**, पर निवेश का तरीका बदला

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Tech Startups: स्टार्टअप्स की चांदी! 9 महीनों में जुटाए **$10.3 बिलियन**, पर निवेश का तरीका बदला

2026 के शुरुआती 9 महीनों में भारतीय टेक स्टार्टअप्स ने **$10.3 बिलियन** की फंडिंग जुटाई है, जो पिछले साल के मुकाबले **7%** ज्यादा है। हालांकि, कुल सौदों (deals) में **18%** की गिरावट आई है, क्योंकि निवेशक अब छोटी कंपनियों की जगह बड़ी और मुनाफा कमाने वाली कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं।

भारतीय टेक सेक्टर में फंडिंग का आंकड़ा $10.3 बिलियन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7% की ग्रोथ है। हालांकि, इस चमक के पीछे एक बड़ा बदलाव यह है कि अब 'आसान पैसा' मिलने का दौर खत्म हो चुका है। कुल डील वॉल्यूम में 18% की कमी यह साफ संकेत देती है कि निवेशक अब बेहद सतर्क हैं और सिर्फ उन्हीं कंपनियों को पैसा दे रहे हैं जिनके पास मजबूत बिजनेस मॉडल और मुनाफे का स्पष्ट रास्ता है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और एफिशिएंसी पर जोर

अब सारा ध्यान कंज्यूमर-फेसिंग ऐप्स से हटकर कोर टेक्नोलॉजी पर आ गया है। Enterprise Infrastructure सेक्टर को $1.6 बिलियन की बड़ी फंडिंग मिली है, जो 436% का जबरदस्त उछाल है। इसमें डेटा सेंटर के विस्तार पर काफी पैसा खर्च किया गया है। वहीं, AI Infrastructure को $1.2 बिलियन, डिजिटल लेंडिंग को $799 मिलियन और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को $773 मिलियन मिले हैं।

यूनिकॉर्न क्लब में भी बदलाव दिख रहा है। इस साल 6 नई कंपनियां यूनिकॉर्न बनी हैं, जो पिछले साल से 50% ज्यादा है। दिलचस्प बात यह है कि इन्हें यूनिकॉर्न बनने के लिए औसतन $101 मिलियन की जरूरत पड़ी, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग आधी है। यानी कंपनियां अब कम कैश में बड़ा बिजनेस खड़ा करने पर फोकस कर रही हैं।

पब्लिक मार्केट में तेजी से एंट्री

कंपनियों के पब्लिक मार्केट (IPO) तक पहुंचने का सफर भी तेज हुआ है। पहले किसी कंपनी को बाजार में आने में 13.7 साल लगते थे, जो अब घटकर 8.5 साल रह गए हैं। Fractal Analytics और Molbio Diagnostics जैसे नामों ने पब्लिक मार्केट में कदम रखा है, जबकि L'Oréal और Adani Energy Solutions जैसे बड़े खिलाड़ी लगातार रणनीतिक अधिग्रहण (acquisitions) कर रहे हैं।

भौगोलिक बदलाव

बेंगलुरु अभी भी स्टार्टअप्स का हब बना हुआ है और कुल फंडिंग का 43% हिस्सा अपने नाम किया है। हालांकि, गुरुग्राम एक मजबूत प्रतिद्वंदी के रूप में उभर रहा है, जहां निवेश की हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है। निवेशकों के लिए साफ संदेश है: अब वही कंपनियां टिकेंगी जो अपनी 'यूनिट इकोनॉमिक्स' और मुनाफे को साबित कर पाएंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.