ग्लोबल तस्वीर और भारत की रैंक
भारत का टेक्नोलॉजी सेक्टर, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में, $11.7 बिलियन जुटाने में कामयाब रहा, जिससे यह दुनिया भर में चौथे पायदान पर आ गया। यह राशि पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY 2024-25) की तुलना में 18% कम है, लेकिन फाइनेंशियल ईयर 2023-24 से 20% ज्यादा है। वहीं, ग्लोबल लेवल पर वेंचर कैपिटल (VC) इन्वेस्टमेंट $425 बिलियन के पार पहुंच गया, जो AI और अमेरिका से मिले मजबूत निवेश के कारण 30% बढ़ा है।
Early-Stage में तेजी, Late-Stage में मंदी
भारत में फंडिंग का ट्रेंड बड़ा दिलचस्प रहा। सीड फंडिंग 15% गिरकर $1.3 बिलियन पर आ गई। लेकिन, Early-Stage यानी शुरुआती दौर की फंडिंग में 33% का जबरदस्त उछाल देखा गया और यह $4.8 बिलियन तक पहुंच गई। यह नए और बड़े पैमाने पर आगे बढ़ने वाले सॉल्यूशंस में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है। वहीं, Late-Stage फंडिंग में 38% की तेज गिरावट आई और यह $5.6 बिलियन पर पहुंच गई, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के $9.2 बिलियन से काफी कम है। $100 मिलियन से ऊपर के बड़े फंडिंग राउंड्स की संख्या भी 23 से घटकर 13 रह गई, जो ग्रोथ-स्टेज फर्म्स के लिए निवेशकों की बढ़ती सावधानी का संकेत है।
टॉप सेक्टर्स और एग्जिट एक्टिविटी
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में एंटरप्राइज एप्लीकेशन्स, फिनटेक और रिटेल सेक्टर्स ने सबसे ज्यादा निवेश आकर्षित किया। एंटरप्राइज एप्लीकेशन्स ने $3.6 बिलियन (फाइनेंशियल ईयर 2023-24 से 23% ज्यादा), फिनटेक ने $2.4 बिलियन ( 14% ज्यादा) और रिटेल ने भी $2.4 बिलियन की फंडिंग पाई। इसके अलावा, एग्जिट एक्टिविटी यानी कंपनियों के बाहर निकलने (जैसे IPO) में भी जोरदार उछाल आया। इस दौरान 47 IPOs आए, जो पिछले साल से 52% ज्यादा हैं। भारत की GDP ग्रोथ 6.5% से 7.6% रहने का अनुमान है, ऐसे में 6 नए यूनिकॉर्न का जन्म होना भी इकोसिस्टम की परिपक्वता और कैपिटल एफिशिएंसी को दर्शाता है।
निवेशकों का बढ़ता फोकस
Early-Stage और Late-Stage फंडिंग के बीच का यह अंतर बताता है कि निवेशक अब कंपनियों पर ज्यादा बारीक नजर रख रहे हैं। शुरुआती स्टेज की कंपनियों को जहां फंड मिल रहा है, वहीं ग्रोथ स्टेज वाली कंपनियों के लिए फंडिंग जुटाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में कंपनियों को अब मजबूत गवर्नेंस और लाभप्रदता (Profitability) पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
आगे का रास्ता
विश्लेषकों का मानना है कि कुल फंडिंग में कमी के बावजूद, Early-Stage में मजबूत ग्रोथ यह दिखाता है कि निवेशक अभी भी यूनिक और स्केलेबल सॉल्यूशंस में विश्वास रखते हैं। भविष्य में लाभप्रदता और एफिशिएंसी पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। भारत की घरेलू मांग और सुधारों के चलते, ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद सेक्टर में लचीला विकास जारी रहने की उम्मीद है। 2026 तक फंडिंग में वापसी की संभावना है, खासकर AI और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस में।