फंडिंग घटी, AI और IPO ने बदला मिजाज
फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में भारतीय स्टार्ट-अप्स की फंडिंग पिछले साल के मुकाबले 10% घटकर $10.16 बिलियन पर आ गई है। यह गिरावट इन्वेस्टर्स की सोच में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है। अब वे अर्ली-स्टेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं और लेट-स्टेज (बड़ी) डील्स से पीछे हट रहे हैं। इसके पीछे ग्लोबल अनिश्चितताएं और IPO मार्केट का मजबूत होना भी बड़ी वजहें हैं।
AI पर दांव, अर्ली-स्टेज को बंपर वैल्यूएशन
AI इस वक्त दुनिया भर में इन्वेस्टमेंट का सबसे बड़ा थीम है। 2025 में ग्लोबल वेंचर डील्स का 65% यानी $339.4 बिलियन AI से जुड़ी कंपनियों में लगे। भारत पर भी इसका असर दिख रहा है। भारत में AI-फोक्स्ड वेंचर फंड्स ने 2025 में $1.87 बिलियन जुटाए, जो पिछले साल के $358 मिलियन से काफी ज्यादा है। Lightspeed Venture Partners जैसी फर्मों ने अपनी ज्यादातर डील्स में AI को प्राथमिकता दी। AI में तेजी लाने की क्षमता को देखते हुए, अर्ली-स्टेज AI स्टार्ट-अप्स को सीरीज A और B राउंड्स में नॉन-AI कंपनियों के मुकाबले कहीं बेहतर वैल्यूएशन मिल रहा है।
लेट-स्टेज डील्स पर कस कस
Kae Capital के जनरल पार्टनर अभिषेक श्रीवास्तव के मुताबिक, अब इन्वेस्टर्स मैच्योरिटी के करीब पहुंच रही कंपनियों के लिए 'कड़ी शर्तें' लगा रहे हैं। प्रॉफिटेबिलिटी, यूनिट इकोनॉमिक्स और वैल्यूएशन पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यही वजह है कि लेट-स्टेज डील्स में बड़ी रकम के चेक कम लिखे जा रहे हैं।
IPO मार्केट की बढ़ती ताकत
भारत का IPO मार्केट भी इस ट्रेंड को हवा दे रहा है। 2025 में रिकॉर्ड 18 भारतीय स्टार्ट-अप्स पब्लिक हुए और उन्होंने ₹41,248 करोड़ जुटाए। यह सीधे तौर पर वेंचर कैपिटल के लिए एक कॉम्पिटिटर बन गया है। डेटा बताता है कि 2025 में आए 55% IPOs अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। इससे साफ होता है कि मार्केट अब ग्रोथ से ज्यादा प्रॉफिटेबिलिटी चाहता है। SoftBank जैसी बड़ी फर्म भी अब ज्यादा सोच-समझकर दांव लगा रही है और IPO मार्केट के साथ कम्पटीशन में है।
ग्लोबल टेंशन और निवेश में नरमी
बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन और बदलते ग्लोबल ट्रेड पॉलिसीज ने इन्वेस्टमेंट माहौल को और सतर्क बना दिया है। Q3 2025 में इंडिया में प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट धीमा पड़ा, जो 2019 के बाद सबसे कमजोर साल का संकेत हो सकता है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स अब रिस्क लेने से कतरा रहे हैं और कैपिटल बचा रहे हैं, जिससे क्रॉस-बॉर्डर इन्वेस्टमेंट धीमे पड़ रहे हैं।
AI में 'ओवरक्राउडिंग' का रिस्क
AI पर बढ़ते फोकस के बावजूद, इंडिया के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में रिस्क बने हुए हैं। अभिषेक श्रीवास्तव की मानें तो AI में 'भीड़' बढ़ने से वैल्यूएशन बढ़ सकता है और अस्थिर प्रतिस्पर्धा पैदा हो सकती है। कई AI कंपनियां अभी शुरुआती दौर में हैं और उन्हें बड़े स्केल के लिए जरूरी सीरीज A या B फंडिंग मिलने में वक्त लग सकता है। SoftBank का AI इंफ्रास्ट्रक्चर और बायआउट्स पर फोकस, अनुशासित और रेवेन्यू-केंद्रित निवेश की ओर इशारा करता है।
आगे क्या?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आगे चलकर इन्वेस्टर्स और भी सेलेक्टिव होंगे और उन कंपनियों पर फोकस करेंगे जिनका प्रॉफिटेबिलिटी का रास्ता साफ है। AI एक बड़ा थीम बना रहेगा, लेकिन कैपिटल मार्केट लीडर्स और AI इकोसिस्टम के इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित होगा। Fintech और SaaS जैसे सेक्टर भी स्थिर निवेश आकर्षित करते रहेंगे। भारतीय स्टार्ट-अप इकोसिस्टम अब क्वालिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को ज्यादा महत्व दे रहा है, जो कि स्वस्थ, लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए जरूरी है।