भारतीय स्टार्टअप्स के लिए पिछला हफ्ता काफी राहत भरा रहा। 25 जून को खत्म हुए हफ्ते में, फिनटेक यूनिकॉर्न CRED की **$900 मिलियन** की बड़ी डील की बदौलत कुल फंडिंग **$1.065 अरब** से ज्यादा हो गई। यह एक बड़ा उछाल है, लेकिन यह अर्ली-स्टेज कंपनियों के लिए अच्छी खबर नहीं है।
निवेशकों का फोकस किस पर?
19 से 25 जून के बीच, भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में पैसों का फ्लो $1 अरब के पार पहुंच गया, जो कई हफ्तों में पहली बार हुआ है। कुल मिलाकर, स्टार्टअप्स ने 10 से ज्यादा डील्स में $1.065 अरब से ज्यादा की रकम जुटाई। पिछले हफ्ते यह आंकड़ा सिर्फ $350 मिलियन के करीब था। इस भारी-भरकम आंकड़े का सबसे बड़ा श्रेय फिनटेक कंपनी CRED को जाता है, जिसने अकेले $900 मिलियन का फंड जुटाया है।
अर्ली-स्टेज में क्यों लग रहा है ब्रेक?
हालांकि कुल फंडिंग का आंकड़ा शानदार दिख रहा है, लेकिन निवेश का तरीका एक खास ट्रेंड की ओर इशारा करता है। इस हफ्ते जुटाए गए कुल फंड का $1.012 अरब यानी 95% से ज्यादा हिस्सा उन कंपनियों के पास गया जो लेट-स्टेज (Late-Stage) में हैं। इसका मतलब है कि नई या अर्ली-स्टेज कंपनियों के मुकाबले एस्टैब्लिश हो चुकी और बड़े रेवेन्यू वाली कंपनियों को तरजीह दी जा रही है।
रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म Square Yards ने भी $95.1 मिलियन जुटाए। यह पैटर्न दिखाता है कि निवेशक इस वक्त काफी सतर्क हैं और छोटी या एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाने के बजाय, कुछ चुनिंदा, भरोसेमंद और एस्टैब्लिश कंपनियों में बड़ी रकम लगाना पसंद कर रहे हैं।
अर्ली-स्टेज और सीड-स्टेज का बुरा हाल
जहां लेट-स्टेज फंडिंग में बूम रहा, वहीं अर्ली-स्टेज और सीड-स्टेज स्टार्टअप्स के लिए हालात मुश्किल हो गए। अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग घटकर सिर्फ $50 मिलियन रह गई, जो पिछले हफ्ते $309.6 मिलियन थी। वहीं, सीड-स्टेज स्टार्टअप्स के लिए तो यह आंकड़ा $2.3 मिलियन पर आ गिरा, जबकि पहले यह $25.1 मिलियन था।
यह 'क्वालिटी की ओर फ्लाइट' (Flight to Quality) का ट्रेंड है। अनिश्चित बाजार में, वेंचर कैपिटल निवेशक अपना रिस्क कम करने के लिए अर्ली-स्टेज के प्रयोगों से बचते हैं और उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जिन्होंने पहले ही अपना रेवेन्यू और ग्रोथ साबित कर दी है। इस हफ्ते की कुछ अन्य बड़ी डील्स में Coval.ai ($28 मिलियन), AllHome ($21 मिलियन), Recykal ($17.6 मिलियन) और Mitigata ($15 मिलियन) शामिल हैं।
आगे क्या देखना होगा?
इस हफ्ते के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय स्टार्टअप फंडिंग में कुछ बहुत बड़ी डील्स हावी हैं। अब यह देखना होगा कि 'कम लेकिन बड़ी डील्स' का यह ट्रेंड जारी रहता है या फिर अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स के लिए भी निवेशकों का भरोसा लौटता है।
निवेशकों की नजर इस बात पर भी होगी कि इन लेट-स्टेज कंपनियों में आए इस पैसे से वे कितनी प्रॉफिटेबिलिटी और एफिशिएंसी दिखा पाते हैं। भविष्य में इंटरेस्ट रेट या आर्थिक चिंताएं फंडिंग को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए यह देखना अहम होगा कि ये कंपनियां इस बड़ी पूंजी का इस्तेमाल कैसे करती हैं।
