शिक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली में 'Bharat Innovates Exposition' शुरू किया है, जहां **37** हाई-पोटेंशियल इंडियन डीप-टेक स्टार्टअप्स को ग्लोबल निवेशकों के सामने रखा गया है। सरकार का यह कदम स्पेस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में एक बड़ी नीतिगत बदलाव का संकेत है।
शिक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने संयुक्त रूप से नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय 'Bharat Innovates Exposition' का आयोजन किया है। इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य 37 चुनिंदा भारतीय स्टार्टअप्स को BRICS देशों के अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और CEOs के साथ जोड़ना है। दिलचस्प बात यह है कि इन स्टार्टअप्स को उन 120 वेंचर्स में से चुना गया है जिन्होंने इस साल की शुरुआत में फ्रांस में अपनी प्रतिभा दिखाई थी।
नई तकनीक पर सरकार का बड़ा दांव
इस इवेंट में शामिल स्टार्टअप्स पूरी तरह से रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। इसमें स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और हेल्थकेयर इनोवेशन शामिल हैं। मुख्य स्टार्टअप्स में Dhruva Space, GalaxEye Space Solutions, WiSig Networks, Vervesemi, QpiAI, 5C Network, Niramai Health Analytix और ImmunoACT जैसे नाम शामिल हैं, जो AI-ड्रिवन डायग्नोस्टिक्स और जीन थेरेपी पर काम कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
रिटेल निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि ये सभी 37 कंपनियां अभी प्राइवेट हैं और इनमें से कोई भी NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं है। इसलिए, अभी इसमें सीधे निवेश का कोई मौका नहीं है। हालांकि, सरकार का यह कदम भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत है। डिफेंस, टेलीकॉम और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में सरकारी समर्थन बढ़ने से आने वाले समय में बड़ी लिस्टेड कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है, क्योंकि उन्हें बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और पार्टनरशिप्स के अवसर मिलेंगे।
रिस्क और चुनौतियां
डीप-टेक में निवेश के अपने जोखिम होते हैं। इन स्टार्टअप्स के साथ काम करने में काफी लंबा समय और भारी फंड खर्च होता है, जो शुरुआती दौर की कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल, निवेशकों को इसे एक सरकारी नीतिगत संकेत के रूप में देखना चाहिए, न कि तुरंत निवेश के अवसर के रूप में।
