वीसी (VC) फर्मों से क्यों जा रहे हैं सीनियर लोग?
भारत की जानी-मानी वेंचर कैपिटल (VC) फर्मों से सीनियर लीडर्स का बाहर निकलना अब आम बात हो गई है। India Quotient के पार्टनर Gagan Goyal का नौ साल बाद कंपनी छोड़ना इसी ट्रेंड का हिस्सा है। कई अनुभवी पार्टनर्स अब बड़ी फर्मों से जुड़कर काम करने की बजाय खुद का रास्ता बनाना चाहते हैं। पिछले दशक में जहां फर्म की ब्रांडिंग पर जोर था, वहीं आज के दौर में व्यक्तिगत ट्रैक रिकॉर्ड ज्यादा मायने रखता है।
फंड्स और IPO के बीच उठा-पटक
India Quotient के लिए यह बदलाव अहम है। कंपनी अपने पांचवें फंड से $129 मिलियन (लगभग ₹1,000 करोड़) जुटाने के बाद अब अपने पोर्टफोलियो की बड़ी कंपनी Kuku FM के IPO पर फोकस कर रही है। Kuku FM का IPO ₹3,500 करोड़ के वैल्यूएशन पर आ सकता है। ऐसे में, लिमिटेड पार्टनर्स (LPs) के लिए यह सवाल खड़ा होता है कि क्या फर्म ऐसे बड़े सौदों को संभाल पाएगी। हाल ही में Kanika Agarrwal और Sahil Makkar को प्रमोट करना, कंपनी के बाकी लीडर्स Anand Lunia और Madhukar Sinha की तरफ से पावर स्ट्रक्चर को स्थिर करने की कोशिश मानी जा रही है।
पार्टनर के जाने का बिज़नेस पर असर?
लगातार पार्टनर का जाना वीसी (VC) इंडस्ट्री में अंदरूनी कलह का संकेत हो सकता है। अगर India Quotient नए टैलेंट को लाने या मौजूदा टीम को बनाए रखने में कामयाब नहीं होता है, तो डील फ्लो (deal flow) पर असर पड़ सकता है। साथ ही, छोटी और कम अनुभवी टीमों वाली फर्मों को नए स्टार्टअप्स को वो सपोर्ट देना मुश्किल हो सकता है, जिसकी उन्हें ज़रूरत है। एक और बड़ा रिस्क यह है कि जिन लोगों ने फंड के शुरुआती निवेश का नेतृत्व किया था, उनके जाने के बाद फंड का पिछला प्रदर्शन दोहराना मुश्किल हो सकता है।
आगे का रास्ता
जैसे-जैसे पुराने पार्टनर अपने अलग फंड शुरू करेंगे, शुरुआती स्टेज के निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। India Quotient को अब यह साबित करना होगा कि उनकी नई लीडरशिप फर्म के निवेश प्रदर्शन को बनाए रख सकती है और Kuku FM के IPO जैसी बड़ी डील्स को सफलतापूर्वक पूरा कर सकती है।
