क्यों Diverse Teams दे रहे हैं बेहतर Returns?
इस बात के पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं कि जेंडर डाइवर्सिटी वाली इन्वेस्टमेंट टीमें, बाकी टीमों की तुलना में 10% से 20% तक ज्यादा नेट इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न्स (Net Internal Rates of Return) हासिल कर सकती हैं। जब टीम में अलग-अलग सोच वाले लोग होते हैं, तो वे नए मौकों को बेहतर तरीके से पहचान पाते हैं और रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) को भी मजबूती से कर पाते हैं। इससे 'ग्रुपथिंक' (Groupthink) जैसी समस्याएं नहीं पनपतीं और इन्वेस्टमेंट के फैसले ज्यादा संतुलित होते हैं।
हकीकत और आंकड़े: कहां खड़ी है इंडस्ट्री?
हालांकि, हकीकत थोड़ी अलग है। ग्लोबल लेवल पर सीनियर इन्वेस्टमेंट रोल्स में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 10-15% है, और भारत में भी यह करीब 12-15% के आसपास है। वहीं, इन्वेस्टमेंट कमेटियों में यह आंकड़ा 10% से भी कम है, जबकि एंट्री-लेवल पर महिलाएं 30-35% होती हैं। इसका असर महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे स्टार्टअप्स (Startups) की फंडिंग पर भी दिखता है। भारत में महिलाओं के अकेले फाउंडिंग वाली टीमों को वेंचर कैपिटल (Venture Capital) का सिर्फ 2.3% हिस्सा मिलता है, जबकि मिले-जुले जेंडर वाली टीमों को 23%। हां, 2025 तक महिलाओं के सह-संस्थापक (Co-founder) वाले स्टार्टअप्स को 11.6% कैपिटल मिली है, जो एक पॉजिटिव संकेत है। SEBI के BRSR (Business Responsibility and Sustainability Reporting) जैसे रेगुलेशन (Regulations) ESG (Environmental, Social, and Governance) फैक्टर्स पर पारदर्शिता बढ़ा रहे हैं, जिसमें वर्कफोर्स डाइवर्सिटी भी शामिल है।
'लीकी पाइपलाइन' और सीनियर रोल्स की चुनौती
फिर भी, कई बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। जूनियर से सीनियर रोल्स तक पहुंचते-पहुंचते महिलाओं की संख्या में भारी कमी ('लीकी पाइपलाइन') एक बड़ी समस्या है। भारत में पीई फर्म्स में पार्टनर या मैनेजिंग डायरेक्टर जैसे टॉप रोल्स में सिर्फ 10% महिलाएं हैं। सीनियर लेवल पर महिलाओं की कमी से लीडरशिप पाइपलाइन कमजोर होती है और कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) में छुपे हुए बायस (Bias) बने रह सकते हैं।
आगे की राह: डाइवर्सिटी ही है कॉम्पिटिटिव एज
ऐसे में, कैपिटल, टैलेंट और टेक्नोलॉजी के इस दौर में, भारतीय प्राइवेट मार्केट्स में डाइवर्सिटी के प्रति एक स्ट्रैटेजिक कमिटमेंट (Strategic Commitment) बहुत जरूरी है। जो फर्म्स अपने इन्वेस्टमेंट प्रोसेस के हर फेज - डील्स ढूंढने से लेकर ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) और पोर्टफोलियो (Portfolio) मैनेज करने तक - में इंक्लूसिव प्रैक्टिस (Inclusive Practices) को अपनाएंगी, वे निश्चित रूप से एक बड़ा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज (Competitive Advantage) हासिल करेंगी और मजबूत, टिकाऊ रिटर्न्स दे पाएंगी।