भारत में PE-VC निवेश में भारी गिरावट! Mega-Deals की कमी ने मचाया हाहाकार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारत में PE-VC निवेश में भारी गिरावट! Mega-Deals की कमी ने मचाया हाहाकार
Overview

जनवरी 2026 में भारत में प्राइवेट इक्विटी-वेंचर कैपिटल (PE-VC) निवेश की वैल्यू में भारी गिरावट देखी गई। इस महीने कुल **$1.49 बिलियन** का निवेश **104** सौदों के जरिए हुआ, जो पिछले साल जनवरी **2025** के **$3.99 बिलियन** (105 सौदे) के मुकाबले काफी कम है। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह बड़े (Mega-Deals) यानी **$100 मिलियन** से बड़े सौदों की संख्या में भारी कमी रही।

Mega-Deals की कमी से निवेश पर लगा ग्रहण

साल-दर-साल के हिसाब से देखें तो जनवरी 2026 में भारत में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल (PE-VC) द्वारा किए गए कुल निवेश की वैल्यू में करीब तीन गुना की कमी आई है। पिछले साल जनवरी 2025 में जहां $3.99 बिलियन का निवेश हुआ था, वहीं इस साल जनवरी 2026 में यह घटकर केवल $1.49 बिलियन रह गया। यह गिरावट तब आई है जब सौदों की कुल संख्या लगभग स्थिर रही, जनवरी 2026 में 104 सौदे हुए, जबकि जनवरी 2025 में 105 सौदे हुए थे। वेंचर इंटेलिजेंस के आंकड़ों के मुताबिक, निवेश की वैल्यू में इतनी बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह बड़े सौदों (Mega-Deals) की संख्या में भारी कमी रही। जनवरी 2026 में $100 मिलियन से बड़े केवल तीन Mega-Deals हुए, जबकि पिछले साल जनवरी 2025 में ऐसे ग्यारह सौदे हुए थे। बड़े सौदों से पूंजी के फ्लो में कमी ने कुल निवेश के आंकड़े को काफी नीचे धकेल दिया। दिसंबर 2025 की तुलना में भी निवेश वैल्यू में थोड़ी गिरावट आई, जो $1.8 बिलियन थी और इसमें 78 सौदे हुए थे।

निवेशक क्या सोच रहे हैं और सेक्टर का हाल

वेंचर इंटेलिजेंस के फाउंडर अरुण नटराजन का कहना है कि Warburg Pincus जैसे अनुभवी ग्लोबल निवेशकों की भागीदारी जारी रहना भारतीय बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। हालांकि, Mega-Deals की संख्या में कमी बताती है कि निवेशक बड़ी रकम लगाने से पहले ज्यादा सोच-विचार कर रहे हैं। इस महीने का सबसे बड़ा खुलासा हुआ डील नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) Avanse Financial Services के साथ हुआ, जिसने Warburg Pincus, Kedaara Capital और Mubadala Investment के समर्थन से राइट्स इश्यू के जरिए $133 मिलियन जुटाए। अन्य प्रमुख सौदों में Fleur Hotels का $106 मिलियन का फंडरेज़िंग लेमन ट्री होटल्स से और एग्री-लॉजिस्टिक्स फर्म Arya Collateral का $80 मिलियन जुटाना शामिल है। निवेश के चरणों की बात करें तो, अर्ली-स्टेज (Early-stage) फंडिंग 57 सौदों के साथ $341 मिलियन तक पहुंची। ग्रोथ-स्टेज (Growth-stage) निवेश में काफी कमी आई और यह $234 मिलियन पर आ गया, जबकि लेट-स्टेज (Late-stage) निवेश भी पिछले साल के $1.4 बिलियन से घटकर $747 मिलियन रह गया। खास बात यह है कि अर्ली-स्टेज कंपनियों के लिए औसत डील साइज दोगुना होकर $6 मिलियन हो गया, जो जनवरी 2025 में $3 मिलियन था। इसके विपरीत, ग्रोथ और लेट-स्टेज निवेश के लिए औसत डील साइज घटकर क्रमशः $9 मिलियन और $37 मिलियन रह गया।

बाजार का माहौल और भविष्य की राह

भारतीय PE-VC बाजार ने हाल के वर्षों में मजबूती दिखाई है। साल 2024 में फंडिंग $13.7 बिलियन तक पहुंच गई थी, जो 2023 के मुकाबले 1.4 गुना ज्यादा थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2025 में कुल निवेश वैल्यू में मामूली वृद्धि हुई, लेकिन सौदों की संख्या में भारी उछाल देखा गया, जो अर्ली-स्टेज और वेंचर निवेशों से प्रेरित था। इसका मतलब है कि Mega-Deals पर फोकस कम हुआ और छोटे सौदों की संख्या बढ़ी। हाल ही में लेमन ट्री होटल्स के शेयर के प्रदर्शन में मिला-जुला रुख देखा गया; जनवरी 2026 की शुरुआत में शेयर में करीब ₹161.58 (26 दिसंबर 2025 को) से घटकर ₹142.32 (16 जनवरी 2026 तक) हो गया था। हालांकि, 30 जनवरी 2026 को समाप्त हुए हफ्ते में कंपनी के शेयर में 4.19% की तेजी आई और यह ₹129.25 पर बंद हुआ, जिसने उस हफ्ते सेंसेक्स को पीछे छोड़ दिया। नटराजन ने आगे बताया कि भारत सरकार द्वारा डीपटेक आर एंड डी (R&D) और एआई (AI) के लिए अनुकूल फंडिंग पुश से एक मजबूत नींव रखी गई है, जो नए साल में प्राइवेट निवेशकों के लिए एक बेहतर माहौल का संकेत देता है। सरकारी नीतियां, इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस और मजबूत घरेलू खपत जारी निवेश को सहारा दे सकती है, लेकिन वैश्विक व्यापार तनाव और रेगुलेटरी हार्मोनाइजेशन जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी।

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