FY26 में PE-VC Exits में आई बड़ी सेंध: 40% की भारी गिरावट
भारत में प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) Exits की रफ्तार FY26 (मार्च 2026 में समाप्त वित्तीय वर्ष) में बुरी तरह धीमी पड़ गई। 40% की भारी गिरावट के साथ, कुल एग्जिट $18.8 बिलियन पर सिमट गए। यह पिछले साल के $26.1 बिलियन के मुकाबले एक बड़ा झटका है, जब 292 डील्स हुई थीं। इस साल यह संख्या घटकर 223 डील्स रह गई।
बाजार की अनिश्चितता और IPO मार्केट की कमजोरी बनी वजह
इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। ग्लोबल मार्केट में लगातार बनी हुई अनिश्चितता (market volatility) और निवेशकों का सतर्क रवैया मुख्य रहा। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के चलते वैल्यूएशन (valuations) को लेकर खरीदारों और विक्रेताओं दोनों के बीच स्पष्टता की कमी देखी गई। पोंटाक वेंचर्स के फाउंडर प्रेम बर्थासारथी का कहना है, "खरीदार मानते हैं कि वैल्यूएशन बहुत नीचे आ चुके हैं, वहीं विक्रेता सोचते हैं कि यह और गिर सकता है। इस अनिश्चितता से डील्स में कमी आई है।"
IPO मार्केट की खस्ताहाली ने घटाए एग्जिट के मौके
कमजोर IPO मार्केट ने भी PE-VC फंड्स के लिए एग्जिट के रास्ते संकरे कर दिए। फंड्स के लिए यह एक अहम जरिया होता है, लेकिन जब IPOs की लिस्टिंग उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही, तो वे अपने निवेश को भुनाने में झिझक रहे हैं। कुल मिलाकर, FY26 में PE-VC फंडिंग में भी 10% की गिरावट आई, जो $33.9 बिलियन रही, जबकि FY25 में यह $37.8 बिलियन थी।
बड़े डील्स का अभाव और चुनिंदा सेक्टर्स में निवेश
कुछ प्रमुख सौदे हुए, जिनमें KKR द्वारा $1.4 बिलियन में JB Chemicals की 46% हिस्सेदारी Torrent Pharmaceuticals को बेचना और Kedaara Capital द्वारा $1.2 बिलियन में Vishal Mega Mart की 14.2% हिस्सेदारी बेचना शामिल है। Ontario Teachers Pension Plan ने भी Sahyadri Hospitals से अपना एग्जिट किया। हालांकि, $100 मिलियन से बड़े मेगा डील्स (Mega Deals) की संख्या में भी कमी आई। FY26 में 68 मेगा डील्स से $20 बिलियन जुटाए गए, जबकि FY25 में 96 डील्स से $26 बिलियन आए थे।
AI में बूम, हेल्थकेयर और ई-कॉमर्स में गिरावट
सेक्टर-वार प्रदर्शन की बात करें तो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने $4 बिलियन का निवेश आकर्षित किया, जो पिछले साल से काफी अधिक है। इसके विपरीत, हेल्थकेयर फंडिंग $8.6 बिलियन से गिरकर $3.8 बिलियन पर आ गई। ई-कॉमर्स में भी $4.8 बिलियन से घटकर $3 बिलियन का निवेश हुआ।
भविष्य का आउटलुक: टेक स्टार्टअप्स पर पैनी नजर
वेंचर इंटेलिजेंस के फाउंडर अरुण नटराजन का मानना है कि IPO मार्केट की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, प्री-IPO और लेट-स्टेज फंडिंग में, खासकर टेक स्टार्टअप्स के लिए, नरमी जारी रहने की संभावना है। इसके अलावा, निवेशक गल्फ वॉर जैसी घटनाओं से प्रभावित होने वाले सेक्टर्स, जैसे क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट्स और सेमीकंडक्टर्स, में निवेश को लेकर भी एहतियात बरत सकते हैं।