भारत का डीप टेक में बड़ा कदम! ₹1 लाख करोड़ का फंड लॉन्च, इनोवेशन को मिलेगी नई उड़ान

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत का डीप टेक में बड़ा कदम! ₹1 लाख करोड़ का फंड लॉन्च, इनोवेशन को मिलेगी नई उड़ान
Overview

भारत सरकार ने डीप टेक इनोवेशन को ज़बरदस्त बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। **₹1 लाख करोड़** के रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) स्पेशल पर्पस फंड से शुरुआती डिस्बर्समेंट्स (disbursements) शुरू हो गए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाले इनोवेशन को डी-रिस्क (de-risk) करना और डीप-टेक को एक नई एसेट क्लास (asset class) के तौर पर विकसित करना है।

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इनोवेशन को मिलेगा बूस्ट, कैपिटल मल्टीप्लायर की उम्मीद

भारत का ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड अब ऑपरेशनल हो गया है। यह देश की डीप-टेक इनोवेशन को बढ़ावा देने की महत्वाकांक्षाओं की ओर एक बड़ा कदम है। इस फंड को ऐसे हाई-इम्पैक्ट, लॉन्ग-हॉरिजन प्रोजेक्ट्स के रिस्क को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, साथ ही प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करने का लक्ष्य है। उम्मीद है कि यह फंड समय के साथ ₹4-10 लाख करोड़ तक का कैपिटल मल्टीप्लायर (capital multiplier) पैदा करेगा।

कैसे काम करेगा फंड?

यह ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड एक टू-टियर स्ट्रक्चर (two-tier structure) का इस्तेमाल करेगा। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) कस्टोडियन (custodian) के तौर पर काम करेगा और फंड को सेलेक्टेड सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स, जैसे अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFCs) को चैनल करेगा। यह मॉडल डीप-टेक के लिए एक सस्टेनेबल फाइनेंशियल इकोसिस्टम बनाने पर ज़ोर देता है, जो पारंपरिक ग्रांट्स से आगे बढ़कर 'पेशेंस कैपिटल' (patient capital) का एक पूल बनाएगा। शुरुआत में, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंट काउंसिल (BIRAC) को ₹2,000 करोड़ ईच आवंटित किए गए हैं, जो इस कैपिटल डिप्लॉयमेंट की शुरुआत का संकेत देता है।

भारत का डीप टेक परिदृश्य

यह फंड ऐसे समय में आ रहा है जब भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ रहा है। अब डीप-टेक देश की कुल प्राइवेट इक्विटी (private equity) और वेंचर कैपिटल (venture capital) एक्टिविटी का लगभग 15% हिस्सा है, जो 2016 में सिर्फ 4% था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप्स में फंडिंग में साल-दर-साल 58% की ज़बरदस्त उछाल देखी गई है, जिसने $1.2 बिलियन आकर्षित किए। हालांकि, दुनिया के मुकाबले भारत का रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर कुल खर्च (GERD) अभी भी कम है, और प्राइवेट सेक्टर की R&D में भागीदारी सरकारी खर्च से पीछे रही है। यह RDI फंड इसी कमी को दूर करेगा।

एक खास 'डीप-टेक एसेट क्लास' का निर्माण

ANRF की इस पहल का मकसद भारत के फाइनेंशियल सिस्टम में एक डेडिकेटेड 'डीप-टेक एसेट क्लास' स्थापित करना है। इनोवेशन को डी-रिस्क करके और कैपिटल डिप्लॉयमेंट के लिए एक स्ट्रक्चर्ड चैनल बनाकर, यह फंड हाई-इम्पैक्ट टेक्नोलॉजिकल वेंचर्स में डोमेस्टिक और फॉरेन इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करेगा। सरकार का लक्ष्य भारत को केवल आईटी सर्विसेज के बैक-ऑफिस से एक टेक्नॉलजी और इनोवेशन पावरहाउस के रूप में बदलना है।

चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं

इस बड़ी पहल के बावजूद, कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि 'ग्रोथ कैपिटल बॉटलनेक' (growth capital bottleneck) और स्पेशलिस्ट डीप-टेक फंड्स की ज़रूरत इन सेक्टर्स में भारत की ग्लोबल लीडरशिप को धीमा कर सकती है। इसके अलावा, डीप-टेक वेंचर्स के लंबे जेस्टेशन पीरियड्स (gestation periods) के कारण 'पेशेंस कैपिटल' की ज़रूरत को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। RDI फंड इस ज़रूरत को पूरा करने में मदद करेगा, लेकिन यह फंड मैनेजर्स पर निर्भर करेगा कि वे कितने प्रभावी ढंग से प्रोजेक्ट्स की पहचान और पोषण करते हैं।

आगे की राह

RDI फंड को निरंतर इनोवेशन के लिए एक कैटेलिस्ट (catalyst) के रूप में देखा जा रहा है। ANRF को उम्मीद है कि ₹1 लाख करोड़ का यह शुरुआती कॉर्पस (corpus) प्राइवेट सेक्टर के R&D निवेश को बढ़ाएगा, जिससे लंबे समय में आर्थिक विकास होगा और भारत 2047 तक एक डेवलप्ड देश बनने के लक्ष्य को हासिल कर सकेगा। डीप-टेक सेक्टर के 2030 तक $30 बिलियन तक पहुंचने और AI के प्रमुख भूमिका निभाने के अनुमान के साथ, यह सरकारी फंड भारत के टेक्नोलॉजिकल भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.