भारत बनेगा ग्लोबल इनोवेशन का पावरहाउस!
स्टार्टअप पॉलिसी फोरम (SPF) द्वारा 'न्यू इकोनॉमी कलेक्टिव' (NEC) का लॉन्च, भारत की ग्लोबल इनोवेशन में लीडर बनने की महत्वाकांक्षा को दिखाता है। यह पहल सिर्फ़ भारत को एक बड़े बाज़ार या टैलेंट सोर्स के तौर पर देखने से कहीं आगे जाती है। NEC, कंपनियों के लिए भारत में निवेश लाने और सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय स्टार्टअप्स को विदेशों में विस्तार करने में मदद करेगी। यह भारत की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और नीतिगत सहयोग में तेज़ी के बीच, ग्लोबल टेक और इन्वेस्टमेंट में एक बड़ी ताकत बनने की राह पर है। हाल ही में हुए इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में मिले अंतरराष्ट्रीय समझौते और निवेश के वादे, ग्लोबल टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और गवर्नेंस को आकार देने के राष्ट्रीय एजेंडे को और मज़बूत करते हैं।
ग्लोबल और भारतीय स्टार्टअप्स का संगम
NEC एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेगा, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय बाज़ार में एंट्री और रेगुलेशन की प्रक्रिया आसान होगी, साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स के लिए विदेश जाने के रास्ते खुलेंगे। SPF के पास पहले से ही 75 से ज़्यादा हाई-ग्रोथ स्टार्टअप्स का एक मज़बूत नेटवर्क है, जिनकी कुल वैल्यू $100 बिलियन से ज़्यादा है। इसमें 22 यूनिकॉर्न और 14 लिस्टेड कंपनियाँ शामिल हैं। NEC, 'स्टार्टअप सफारी' और 'बिल्ड इन भारत' जैसे SPF के पिछले प्रोग्राम्स का विस्तार है, जिसका लक्ष्य अब एक स्ट्रक्चर्ड तरीके से ग्लोबल आउटरीच को बढ़ाना है। यह पहल खासतौर पर SaaS, AI और FinTech जैसे सेक्टर्स में भारतीय स्टार्टअप्स के लिए फायदेमंद होगी, जो पहले से ही ग्लोबल बाज़ार में अपनी पहचान बना रहे हैं।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में ग्रोथ और निवेश
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम काफी परिपक्व हो रहा है। साल 2025 में वेंचर कैपिटल (VC) इन्वेस्टमेंट लगभग $16 बिलियन तक पहुँच गया, जो 2021-2022 के बूम इयर्स के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। दुनिया भर में, भारत स्टार्टअप इकोसिस्टम के साइज़ में तीसरे स्थान पर है, जहाँ 115 से ज़्यादा यूनिकॉर्न हैं जिनकी कुल वैल्यू $350 बिलियन से ज़्यादा है। एनालिस्ट्स, भारत की डिजिटल एडॉप्शन की रफ़्तार, बड़े टेक टैलेंट पूल और सरकारी नीतियों का समर्थन जैसी ताकतों को देखते हुए सतर्क रूप से आशावादी हैं। हालांकि, अब कैपिटल एफिशिएंसी और प्रॉफिटेबिलिटी पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में भारत से आउटबाउंड निवेश में 67.74% की बढ़ोतरी देखी गई, जो ग्लोबल विस्तार की बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। NEC की यह पहल इसी मोमेंटम का फायदा उठाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
आगे की चुनौतियाँ और सफलता की राह
NEC के लक्ष्य स्पष्ट हैं, लेकिन एक जटिल ग्लोबल माहौल में इसका सफल एग्जीक्यूशन महत्वपूर्ण होगा। इसे स्थापित ग्लोबल एक्सेलेरेटर्स, वेंचर कैपिटल फर्म्स और अन्य सरकारी ट्रेड बॉडीज़ से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। ग्लोबल आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ भी उभरते बाज़ारों में कैपिटल फ्लो को धीमा कर सकती हैं। NEC को टारगेट मार्केट्स में संभावित रेगुलेटरी बाधाओं को दूर करना होगा और यह साबित करना होगा कि इसकी सेवाएँ मौजूदा विकल्पों से ज़्यादा वैल्यू प्रदान करती हैं। AI ऑटोमेशन से भारतीय IT सर्विसेज के लिए चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं, जो NEC द्वारा प्रमोट किए जा रहे AI और डीप टेक जैसे इनोवेशन-लेड सेक्टर्स पर फोकस करने की ज़रूरत को उजागर करता है।