भारतीय B2C ई-कॉमर्स स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग का माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। नवंबर 2026 तक स्टार्टअप्स ने कुल **$1.6 बिलियन** जुटाए हैं, जो पिछले साल की समान अवधि के **$2.4 बिलियन** के मुकाबले **33%** कम है।
भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर में निवेश की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है। साल 2026 के शुरुआती दस महीनों में कुल फंडिंग $1.6 बिलियन रही है, जो पिछले साल के $2.4 बिलियन से 33% कम है। निवेशकों का अब 'बड़े दांव' लगाने के बजाय चुनिंदा स्टार्टअप्स पर फोकस बढ़ा है।
कहाँ दिखी सबसे ज्यादा सुस्ती?
सबसे बड़ी गिरावट लेट-स्टेज फंडिंग में देखी गई है, जो 51% गिरकर $587 मिलियन रह गई है। इसके अलावा, सीड-स्टेज फंडिंग में भी 50% की कमी आई है, जिसका आंकड़ा $169 मिलियन रहा। राहत की बात केवल अर्ली-स्टेज वेंचर्स में रही, जहां फंडिंग मामूली बढ़त के साथ $872 मिलियन रही है।
बड़े सौदों का सूखा
साल 2026 में केवल एक ही डील $100 मिलियन के आंकड़े को पार कर पाई, जो FS Life की $110 मिलियन की सीरीज-बी राउंड थी। तुलनात्मक रूप से पिछले साल ऐसे तीन 'मेगा' सौदे हुए थे। कुल डील्स की संख्या भी घटकर 356 रह गई, जो पिछले साल 621 थी।
एग्जिट के रास्ते सीमित
वेंचर कैपिटल के लिए एग्जिट विकल्प जैसे कि एक्विजिशन और IPO में भी कमी आई है। एक्विजिशन डील 19 रह गई हैं, जबकि IPO की संख्या गिरकर 7 हो गई है। हालिया घटनाओं में L’Oréal द्वारा Innovist का अधिग्रहण और USV India द्वारा Wellbeing Nutrition की खरीद शामिल है। हालांकि, Astrotalk ने अगस्त में यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया, लेकिन यह मुख्य रूप से इंटरनल ESOP बायबैक के जरिए हुआ।
आगे क्या होगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब 'ग्रोथ एट एनी कॉस्ट' का दौर खत्म हो चुका है। अब वही कंपनियां टिक पाएंगी जो कैपिटल एफिशिएंसी दिखा सकेंगी। साल के अंत तक अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या 2027 में बड़े निवेशक फिर से मार्केट में वापसी करते हैं या स्टार्टअप्स को अपने बैलेंस शीट को और लीन रखना होगा।
