भारत के AI स्टार्टअप्स अब जनरल-पर्पस मॉडल की दौड़ से हटकर स्पेशलाइज्ड बिजनेस सॉफ्टवेयर पर फोकस कर रहे हैं। Dvar AI और Erid Bio जैसी कंपनियों को भारी फंडिंग मिल रही है क्योंकि वे सीधे एंटरप्राइज और बायोटेक की समस्याओं को हल कर रही हैं।
फंक्शनल AI की ओर बदलाव
दुनियाभर के बड़े वेंचर कैपिटल (VC) अब भारतीय AI स्टार्टअप्स पर पैसा लगा रहे हैं, लेकिन निवेश की रणनीति पूरी तरह बदल गई है। अब भारी-भरकम और सब कुछ करने वाले मॉडल के बजाय, निवेशकों का पूरा ध्यान 'एजेंटिक AI' (Agentic AI) पर है। यानी ऐसा सॉफ्टवेयर जो बिजनेस के स्पेसिफिक काम खुद कर सके—चाहे वह ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट हो या ड्रग डिस्कवरी। Peak XV Partners, Lightspeed, और General Catalyst जैसे नाम अब इन्हीं फर्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
Zomato के पूर्व एग्जीक्यूटिव रिंशुल चंद्रा का नया वेंचर मर्चेंट-साइड AI एजेंट्स के लिए $8-10 मिलियन की फंडिंग जुटा रहा है। Dvar AI एंटरप्राइज कंप्लायंस को सुधारने पर काम कर रही है, तो Erid Bio बायोलॉजिकल मॉलिक्यूल डिजाइन में AI का इस्तेमाल कर रही है। ये कंपनियां सीधे कंज्यूमर चैटबॉट्स से मुकाबला करने के बजाय मौजूदा एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर में फिट होने वाले प्रोडक्ट्स बना रही हैं।
रिस्क और चुनौतियां
निवेशकों को इन स्टार्टअप्स में निवेश करने से पहले कुछ कड़े रिस्क को भी समझना होगा।
- एग्जीक्यूशन रिस्क: एंटरप्राइज-ग्रेड टास्क के लिए भरोसेमंद AI बनाना काफी महंगा और मुश्किल है। इसके लिए टैलेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च की जरूरत होती है।
- डेटा और रेगुलेशन: ये स्टार्टअप संवेदनशील डेटा का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन्हें सख्त डेटा सुरक्षा मानकों का पालन करना पड़ता है। अगर ये सुरक्षा या अनुपालन में पीछे रहे, तो सरकारी नियम उनके रास्ते का कांटा बन सकते हैं।
- फंडिंग पर निर्भरता: चूंकि ये कंपनियां अभी शुरुआती दौर में हैं, इसलिए इनका पूरा दारोमदार लगातार मिलने वाली नई फंडिंग पर है। अगर मार्केट में AI-ड्रिवन ऑटोमेशन की मांग उम्मीद से धीमी रही, तो इन्हें कैश फ्लो की भारी किल्लत झेलनी पड़ सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि ये स्टार्टअप्स अपने प्रोटोटाइप को बड़े स्तर पर कैसे लागू करते हैं। इनकी कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या ये इंसानी दखल के बिना जटिल वर्कफ्लो को सुरक्षित तरीके से संभालने का भरोसा दिला पाते हैं या नहीं।
