Tracxn की नई रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 2026 के शुरुआती 8 महीनों में IIT और IIM के पूर्व छात्रों द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप्स की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि अब ये टैलेंट जोखिम लेने के बजाय AI-केंद्रित सुरक्षित नौकरियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में बदलाव की आहट
भारतीय स्टार्टअप जगत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म Tracxn के डेटा के मुताबिक, साल 2026 के पहले 8 महीनों में केवल 79 IIT और 20 IIM पूर्व छात्रों ने ही नए टेक स्टार्टअप्स की शुरुआत की है। यह आंकड़ा साल 2025 के कुल नतीजों की तुलना में काफी कम है, जब 307 IIT और 71 IIM ग्रेजुएट्स ने नए वेंचर्स की कमान संभाली थी। हालांकि, भारत में कुल नए टेक स्टार्टअप्स की संख्या साल 2025 के 3,969 से बढ़कर 2026 के शुरुआती महीनों में 6,353 तक पहुंच गई है, लेकिन इसमें 'एलीट' संस्थानों के छात्रों की भागीदारी कम होती जा रही है।
AI का दबदबा और नौकरियों का आकर्षण
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उदय है। स्टार्टअप शुरू करने के जोखिम के बजाय, अब ये ग्रेजुएट्स AI-आधारित कंपनियों में सुरक्षित और भारी सैलरी वाली कॉर्पोरेट भूमिकाएं चुन रहे हैं। निवेशकों का रुख भी अब पूरी तरह बदल चुका है; अब वे 'ग्रोथ' के बजाय उन कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जो मुनाफे (Profit) की ओर साफ रास्ता दिखाती हैं।
रिस्क-रिवॉर्ड का बदलता गणित
हालांकि नए नो-कोड प्लेटफॉर्म्स और AI टूल्स ने प्रोडक्ट बनाना आसान और सस्ता बना दिया है, लेकिन वित्तीय माहौल काफी सख्त हो गया है। आज के दौर में सीनियर प्रोफेशनल्स और टॉप टैलेंट अनिश्चितता के बजाय स्थायित्व (Stability) को चुन रहे हैं। निवेशकों के लिए यह एक अहम संकेत है कि स्टार्टअप्स अब केवल तेजी से विस्तार करने के बजाय 'सस्टेनेबल यूनिट इकोनॉमिक्स' पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करेंगे। आने वाले समय में हो सकता है कि स्टार्टअप्स का नेतृत्व करने वाले प्रोफाइल में भी बड़ा बदलाव देखने को मिले।
