IIM Bangalore के स्टार्टअप इनक्यूबेटर, NSRCEL ने अपने द्वारा सपोर्ट किए गए स्टार्टअप्स की कुल एंटरप्राइज वैल्यू को **$7 बिलियन** से अधिक तक पहुँचा दिया है। यह सेंटर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप टेक्नोलॉजी पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि दस लाख उद्यमियों को सपोर्ट किया जा सके। निवेशकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि NSRCEL एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है और लिस्टेड कंपनी नहीं है, इसलिए इसका कोई शेयर प्राइस या स्टॉक मार्केट में मौजूदगी नहीं है।
NSRCEL की कहानी: $7 बिलियन का माइलस्टोन
भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बैंगलोर का स्टार्टअप हब,Nadathur Sarangapani Raghavan Centre for Entrepreneurial Learning (NSRCEL) एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। साल 2000 में अपनी शुरुआत के बाद से, इस इनक्यूबेटर द्वारा समर्थित स्टार्टअप्स का कुल एंटरप्राइज वैल्यूएशन $7 बिलियन से अधिक हो गया है। यह दिखाता है कि कैसे NSRCEL ने पारंपरिक अकादमिक रिसर्च से प्रैक्टिकल बिजनेस क्रिएशन की ओर कदम बढ़ाया है, और 35,000 से ज़्यादा नौकरियाँ भी पैदा की हैं।
AI और डीप टेक पर नया फोकस
NSRCEL अब नई टेक्नोलॉजी के हिसाब से अपनी रणनीति बदल रहा है। यह सेंटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप टेक्नोलॉजी पर ज़्यादा ज़ोर दे रहा है। इनका लक्ष्य एक ऐसा 'ओपन आर्किटेक्चर' मॉडल तैयार करना है जो AI का इस्तेमाल करके फाउंडर्स को 24/7 सपोर्ट दे सके। इस पहल से सेंटर अपने मौजूदा 238,000 उद्यमियों के प्रभाव को बढ़ाकर दस लाख तक ले जाने की उम्मीद कर रहा है।
इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, NSRCEL अब सिर्फ एक फिजिकल स्पेस से आगे बढ़कर एक हाइब्रिड इकोसिस्टम के तौर पर काम कर रहा है, जो मैनेजमेंट थ्योरी को एक्टिव वेंचर बिल्डिंग के साथ जोड़ता है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में, सेंटर ने 24 भारतीय राज्यों में 720 से ज़्यादा वेंचर्स को सपोर्ट किया। साथ ही, इन्होंने Hindustan Unilever, Goldman Sachs, और Capgemini जैसे बड़े कॉर्पोरेट्स के साथ-साथ T-Hub और IIT Delhi’s FITT जैसे इंस्टीट्यूशनल पार्टनर्स के साथ भी अपने रिश्तों को मजबूत किया है।
स्पेशलाइज्ड सेंटर्स और सक्सेस स्टोरीज
इनक्यूबेटर ने खास इंडस्ट्रीज के लिए स्पेशलाइज्ड 'सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस' (CoEs) भी शुरू किए हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट फिनटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है, जिसे कर्नाटक सरकार से पांच साल का समर्थन मिला हुआ है। सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलर इकोनॉमी भी सेंटर के मुख्य स्तंभ बन गए हैं, जो ग्रीन टेक्नोलॉजी पर फोकस करने वाले स्टार्टअप्स को आकर्षित कर रहे हैं।
NSRCEL प्रोग्राम से निकले कई स्टार्टअप्स ने कमर्शियल ग्रोथ दिखाई है। हाल के उदाहरणों में FluxGen, जिसने ₹28 करोड़ की फंडिंग हासिल की, और The Energy Company, जिसने $2 मिलियन जुटाए। एक और स्टार्टअप, Ukhi, ने $1.2 मिलियन जुटाए, और मेडिकल टेक्नोलॉजी फर्म Anatomech को अपनी कंप्रेशन टेक्नोलॉजी के लिए भारतीय पेटेंट मिला। इनक्यूबेटर महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रोग्राम भी चलाता है, जिसमें Goldman Sachs 10,000 Women प्रोग्राम और नेशनल कमीशन फॉर वुमेन के साथ साझेदारी शामिल है।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
हालांकि $7 बिलियन का आंकड़ा इनक्यूबेटर मॉडल की सफलता को दर्शाता है, लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि NSRCEL एक नॉन-प्रॉफिट संगठन है, जो IIMB Innovations के तहत रजिस्टर्ड है। यह कोई पब्लिकली ट्रेडेड स्टॉक नहीं है, और NSE या BSE पर इसका कोई शेयर प्राइस ट्रैक नहीं किया जाता है।
जोखिम के नज़रिए से, इस वैल्यूएशन को अलग-अलग कंपनियों के फंडिंग राउंड्स पर आधारित एक सामूहिक अनुमान के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि लिक्विड मार्केट वैल्यू के तौर पर। इनक्यूबेटर मॉडल स्वाभाविक रूप से शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स की सफलता से जुड़ा होता है, जिनमें फेल होने का जोखिम ज़्यादा होता है। इसके अलावा, इनक्यूबेटर की ऑपरेशनल सस्टेनेबिलिटी लगातार मिलने वाले ग्रांट्स, कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप और सरकारी समर्थन पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे NSRCEL AI और डीप टेक की ओर अपना फोकस बढ़ा रहा है, बड़ी संख्या में वेंचर्स में मेंटरशिप और रिसोर्स सपोर्ट की क्वालिटी बनाए रखना एक अहम फैक्टर होगा जिस पर नज़र रखनी होगी।
