Startups IPO News: निर्मला सीतारमण का स्टार्टअप्स को बड़ा संदेश, IPO लाने की दी सलाह

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AuthorNeha Patil|Published at:
Startups IPO News: निर्मला सीतारमण का स्टार्टअप्स को बड़ा संदेश, IPO लाने की दी सलाह

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय स्टार्टअप्स को अब शुरुआती दौर की फंडिंग से आगे बढ़कर पब्लिक मार्केट यानी IPO लाने पर फोकस करने को कहा है। साथ ही, डीपटेक और हार्डवेयर सेक्टर के लिए उन्होंने 10 दिन के भीतर एक ठोस प्रस्ताव मांगा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बेंगलुरु में आयोजित 'संगम 2026' इवेंट के दौरान भारतीय स्टार्टअप्स को साफ तौर पर कहा है कि अब उन्हें केवल वेंचर कैपिटल (VC) पर निर्भर रहने के बजाय पब्लिक मार्केट में लिस्ट होने की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों का लिस्टेड होना अर्थव्यवस्था के लिए एक जरूरी पड़ाव है।

पब्लिक मार्केट के फायदे और चुनौतियां

फिलहाल कई स्टार्टअप्स प्राइवेट बने रहकर फंडिंग के कई राउंड्स पर निर्भर हैं। वित्त मंत्री ने सुझाव दिया कि पब्लिक मार्केट में आने से न केवल कंपनियों को पूंजी का एक बड़ा जरिया मिलेगा, बल्कि आम निवेशकों को भी नई टेक्नोलॉजी में निवेश का मौका मिलेगा। हालांकि, इसके लिए कंपनियों को अपनी वर्किंग स्टाइल में बदलाव करना होगा। पब्लिक कंपनियों को कड़े गवर्नेंस नियमों और मुनाफे की पारदर्शी रिपोर्टिंग का पालन करना पड़ता है, जो प्राइवेट फंडिंग मॉडल से काफी अलग है।

डीपटेक और 'पेशेंट कैपिटल' पर फोकस

डिसकशन का एक बड़ा हिस्सा डीपटेक और हार्डवेयर सेक्टर पर केंद्रित था। वित्त मंत्री ने माना कि इन क्षेत्रों में डेवलपमेंट का समय लंबा होता है, जिसके लिए 'पेशेंट कैपिटल' यानी ऐसी पूंजी की जरूरत होती है जो लंबे समय तक निवेशित रहे। उन्होंने इंडस्ट्री लीडर्स से 10 दिन के भीतर अपनी फंडिंग जरूरतों को लेकर एक औपचारिक प्रस्ताव देने को कहा है। सेमीकंडक्टर्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में तुरंत प्रॉफिट का दबाव कम रखने के लिए यह कदम बहुत अहम है।

सरकार की भविष्य की रणनीति

सरकार अब स्पेस और डिफेंस सेक्टर की तरह ही हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में भी निजी भागीदारी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि भविष्य में सरकार इन सनराइज सेक्टरों में पूंजी के प्रवाह को आसान बनाने के लिए बड़े कदम उठा सकती है। हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि डीपटेक में रिसर्च की लागत और बाजार में पकड़ बनाने का समय ज्यादा हो सकता है, जो कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में सरकार के इस नए फ्रेमवर्क पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.