FICCI का नया कदम: स्टार्टअप्स में आएगा ₹2500 करोड़ से ज़्यादा का पैसा, लॉन्च हुआ फैमिली ऑफिस फोरम

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AuthorMehul Desai|Published at:
FICCI का नया कदम: स्टार्टअप्स में आएगा ₹2500 करोड़ से ज़्यादा का पैसा, लॉन्च हुआ फैमिली ऑफिस फोरम

FICCI यानी फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम (startup ecosystem) के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने एक नया प्लेटफॉर्म, फैमिली ऑफिस फोरम (Family Office Forum) लॉन्च किया है, जिसका मकसद लगभग 300 फैमिली ऑफिस (family offices) से जुड़े करीब **$30 बिलियन** यानी **₹2500 करोड़** से ज़्यादा के प्राइवेट कैपिटल (private capital) को स्टार्टअप्स में निवेश करवाना है।

निवेश का नया रास्ता

FICCI का यह नया फोरम, भारत के अमीर परिवारों द्वारा चलाए जाने वाले इन्वेस्टमेंट ग्रुप्स को एक साथ लाने की कोशिश है। अभी तक ये फैमिली ऑफिस अलग-अलग तरीके से निवेश करते थे, लेकिन इस फोरम के ज़रिए वे अब मिलकर नए आइडियाज़ (deal flow) शेयर कर सकेंगे, ज्वाइंट ड्यू डिलिजेंस (joint due diligence) कर सकेंगे और साथ मिलकर निवेश (co-investment strategies) करने की योजना बना सकेंगे।

स्टार्टअप्स को होगा फायदा

इस पहल से स्टार्टअप्स को फायदा यह होगा कि उन्हें लंबे समय के लिए पैसा मिलना आसान हो जाएगा। फैमिली ऑफिस का पैसा अक्सर वेंचर कैपिटल (Venture Capital) फंड्स की तरह मार्केट के उतार-चढ़ाव से ज़्यादा प्रभावित नहीं होता। FICCI का फोरम इस प्रक्रिया को आसान बनाएगा, जिससे स्टार्टअप्स को फंड जुटाने में लगने वाला समय और मेहनत कम होगी।

फैमिली कैपिटल का महत्व

FICCI स्टार्टअप कमेटी के चेयरमैन, संजीव बिखचंदानी (Sanjeev Bikhchandani) का कहना है कि जैसे-जैसे भारतीय परिवार अमीर हो रहे हैं, वे अपने निवेशों को लेकर और ज़्यादा स्पेशलाइज्ड (specialized) हो रहे हैं, और उन्हें ऐसे प्लेटफॉर्म्स की ज़रूरत है जहाँ वे मिलकर काम कर सकें। फैमिली ऑफिस का पैसा 'एवरग्रीन' (evergreen) होता है, यानी यह लंबे समय तक निवेशित रह सकता है, जो स्टार्टअप्स को मुश्किल समय में स्थिरता दे सकता है।

निवेशकों पर असर

यह कदम दिखाता है कि भारतीय स्टार्टअप्स में घरेलू अमीरों का निवेश बढ़ रहा है। पहले ज़्यादातर पैसा विदेशी निवेशकों से आता था। इससे विदेशी पूंजी पर निर्भरता कम होगी। अब यह देखना होगा कि ये 300 ऑफिस मिलकर फैसले कैसे लेते हैं और अपने निवेशों का मैनेजमेंट कैसे करते हैं। यह फोरम भारतीय स्टार्टअप्स के लिए कितना बड़ा बदलाव लाएगा, यह इसके को-इन्वेस्टमेंट (co-investment) की क्वालिटी और पारदर्शिता पर निर्भर करेगा।

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