ET Startup Awards 2026: समाज सेवा करने वाली कंपनियों पर दांव, मुनाफे और असर दोनों पर फोकस

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ET Startup Awards 2026: समाज सेवा करने वाली कंपनियों पर दांव, मुनाफे और असर दोनों पर फोकस

Economic Times ने 12वें वार्षिक स्टार्टअप अवार्ड्स के लिए सोशल एंटरप्राइज कैटेगरी के नॉमिनीज़ का ऐलान कर दिया है। इन स्टार्टअप्स को सामाजिक या पर्यावरणीय बदलाव के साथ-साथ वित्तीय लाभ कमाने के लिए पहचाना गया है। हालांकि ये कंपनियाँ प्राइवेट हैं और स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं हैं, लेकिन इनका ग्रोथ और फंडिंग मॉडल भारतीय इम्पैक्ट इन्वेस्टिंग के बदलते परिदृश्य पर अहम जानकारी देते हैं।

'सोशल एंटरप्राइज' कैटेगरी के नॉमिनीज़

Economic Times ने अपने 12वें वार्षिक स्टार्टअप अवार्ड्स में 'सोशल एंटरप्राइज' कैटेगरी के नॉमिनीज़ की घोषणा की है। यह कैटेगरी उन बिज़नेस पर फोकस करती है जो 'डबल बॉटमलाइन' मॉडल पर काम करते हैं। इसका मतलब है कि ये कंपनियाँ समाज और पर्यावरण की समस्याओं को हल करने के साथ-साथ वित्तीय मुनाफा भी कमाती हैं। इन नॉमिनीज़ में हेल्थकेयर, एग्रीकल्‍चर और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे सेक्टर्स की कंपनियाँ शामिल हैं, जिन्हें प्राइवेट वेंचर कैपिटल (VC) का सपोर्ट मिला है।

खास नॉमिनीज़ और उनके बिज़नेस मॉडल

ये नॉमिनेटेड कंपनियाँ ऐसे सेक्टर्स में काम कर रही हैं जहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर या फॉर्मल सर्विसज़ की पहुँच ऐतिहासिक रूप से कम रही है।

  • Padcare Labs: सैनिटरी वेस्ट रीसाइक्लिंग पर फोकस करती है, जिससे पर्यावरण और पब्लिक हेल्थ दोनों चिंताएं दूर होती हैं।
  • Cornext: एग्रीकल्‍चर सेक्टर में डेयरी फार्मर्स के लिए चारे की कमी को पूरा करने हेतु साइलेज बेलर मशीनें उपलब्ध कराती है।
  • Karo Sambhav: सर्कुलर इकोनॉमी में काम करती है। यह इलेक्ट्रॉनिक और प्लास्टिक कचरे के मैनेजमेंट के लिए नेटवर्क बनाती है, जिससे ब्रांड्स को अपनी एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) की ज़रूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • Varaha: छोटे किसानों के साथ मिलकर सस्टेनेबल फार्मिंग के ज़रिए कार्बन क्रेडिट्स जेनरेट करती है, जिन्हें ग्लोबल कॉर्पोरेशन्स को बेचा जाता है।
  • CureBay: एक हाइब्रिड हेल्थकेयर नेटवर्क चलाती है। यह टेक-एनेबल्ड ई-क्लिनिक्स स्थापित करके ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के पिछड़े ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में मेडिकल कंसल्टेशन और डायग्नोस्टिक्स की सुविधा देती है।

निवेशकों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

यह जानना ज़रूरी है कि इनमें से कोई भी कंपनी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है। इसलिए, इनका कोई पब्लिक शेयर प्राइस नहीं है और इनके फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स पर लिस्टेड कंपनियों की तरह रेगुलेटरी डिस्क्लोजर की ज़रूरत नहीं होती।

हालांकि, ये स्टार्टअप्स व्यापक इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम के लिए प्रासंगिक हैं क्योंकि इन्हें जाने-माने वेंचर कैपिटल (VC) और प्राइवेट इक्विटी (PE) फर्म्स का सपोर्ट मिला है। उदाहरण के लिए, Omnivore, WestBridge Capital और British International Investment जैसी फर्म्स ने इन एंटिटीज़ में पैसा लगाया है। हाल की फंडिंग एक्टिविटी, जैसे कि Karo Sambhav का ₹56 करोड़ जुटाना (जून 2026) और Padcare Labs का $3 मिलियन हासिल करना (फरवरी 2026), यह दर्शाती है कि इम्पैक्ट-फोकस्ड बिज़नेस मॉडल में कैपिटल का फ्लो बढ़ रहा है।

जोखिम और निगरानी योग्य बातें

ये कंपनियाँ अभी प्राइवेट वेंचर स्टेज में हैं, इसलिए इनमें स्थापित लिस्टेड कंपनियों की तुलना में अलग तरह के जोखिम हैं। सबसे बड़ा जोखिम लिक्विडिटी का है; प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट अक्सर इलिक्विड होते हैं, जिसका मतलब है कि निवेशक आसानी से बाहर नहीं निकल सकते। इसके अलावा, इन कंपनियों को अपने मुनाफे के मार्जिन और सामाजिक प्रभाव के लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण एग्जीक्यूशन रिस्क का सामना करना पड़ता है। यदि ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ती है या डिमांड उम्मीद के मुताबिक स्केल नहीं करती, तो इन स्टार्टअप्स की वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठ सकता है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम को ट्रैक करने वाले निवेशकों को भविष्य की फंडिंग राउंड्स, कैश बर्न रेट्स और इन कंपनियों की सेल्फ-सस्टेनिंग प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, रेगुलेटरी बदलाव, जैसे कि Karo Sambhav जैसी कंपनियों को प्रभावित करने वाले EPR गाइडलाइंस में बदलाव, ऐसे महत्वपूर्ण कारक हैं जो इनके ऑपरेशनल कॉस्ट और ग्रोथ ट्रैजेक्टरी को बदल सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.