दिल्ली सरकार ने स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप से कमर्शियल सफलता तक पहुँचाने के लिए ₹50 करोड़ के बजट के साथ Go-Delhi Foundation की शुरुआत की है। यह पहल कुल ₹400 करोड़ की पॉलिसी का हिस्सा है, जिससे राजधानी के 21,000 से अधिक स्टार्टअप्स को तकनीकी मदद और सरकारी पायलट प्रोजेक्ट्स का लाभ मिलेगा।
स्टार्टअप्स के लिए नई उम्मीद
दिल्ली सरकार ने स्थानीय स्टार्टअप्स की ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए 'Go-Delhi Foundation' का गठन किया है। यह फाउंडेशन इंडस्ट्री विभाग के तहत एक 'Section 8' कंपनी के रूप में काम करेगा, जिसे ₹50 करोड़ का शुरुआती बजट दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य शुरुआती दौर के उन वेंचर्स की मदद करना है, जो प्रोटोटाइप तो तैयार कर लेते हैं, लेकिन बाजार में उसे उतारने में संघर्ष करते हैं।
कैसे काम करेगा यह फाउंडेशन?
पारंपरिक इनक्यूबेटर्स के विपरीत, यह फाउंडेशन फाउंडर्स की ऑपरेशनल परेशानियों को कम करने पर केंद्रित है। यह प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, टेस्टिंग लैब्स और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़ी कानूनी सलाह के लिए एक 'सिंगल विंडो' की तरह काम करेगा।
इसकी सबसे खास बात 'रियल-वर्ल्ड टेस्टिंग' है। सरकार अपने विभागों को स्टार्टअप्स के लिए टेस्टिंग साइट्स के रूप में इस्तेमाल करेगी। इससे स्टार्टअप्स को अपने प्रोडक्ट को टेस्ट करने और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने का मौका मिलेगा। यह पूरा प्लान 'दिल्ली स्टार्टअप एंड इनक्यूबेशन पॉलिसी 2026' का हिस्सा है, जिसके लिए कुल ₹400 करोड़ का फंड रखा गया है।
प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां
वर्तमान में दिल्ली में 21,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स हैं, जिन्हें DPIIT से मान्यता मिली हुई है। हालांकि, दिल्ली को कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से कड़ी टक्कर मिल रही है, जिन्होंने अब तक काफी वेंचर कैपिटल खींचा है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली सरकार इन स्टार्टअप्स को सरकारी सिस्टम के साथ कितनी तेजी से जोड़ पाती है, क्योंकि इस पहल की सफलता इसी पर निर्भर करेगी।
