दिल्ली सरकार अपनी नई 'स्टार्टअप एंड इनक्यूबेशन पॉलिसी 2026' को अंतिम रूप देने के लिए आज एक राउंडटेबल मीटिंग आयोजित कर रही है। इसका मुख्य मकसद स्टार्टअप्स के सामने आने वाली दिक्कतों को कम करना और दिल्ली को बेंगलुरु-हैदराबाद जैसे टेक हब के मुकाबले खड़ा करना है।
नई रणनीति और विजन
दिल्ली सरकार ने आज नई दिल्ली के 'द ललित' होटल में एक हाई-लेवल बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में हो रही इस बैठक का उद्देश्य 'विकसित भारत 2047' के विजन के साथ राज्य की स्टार्टअप फ्रेमवर्क को जोड़ना है। इस पहल को 'डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेनिंग एंड टेक्निकल एजुकेशन' और 'यूथ फॉर गवर्नेंस' द्वारा आयोजित किया गया है।
उद्योग के बड़े दिग्गजों की भागीदारी
इस चर्चा में स्टार्टअप जगत के कई नामी चेहरे शामिल हुए हैं, जिनमें Info Edge के संजीव भिक्चंदानी, Snapdeal के कुणाल बहल, boAt के अमन गुप्ता और अनन्या बिड़ला जैसे दिग्गज शामिल हैं। सरकार का फोकस इन अनुभवी लोगों से सीधे फीडबैक लेना है, ताकि अनुपालन (Compliance) का बोझ कम हो सके और इनक्यूबेशन के लिए बेहतर स्पेस मिल सके।
बेंगलुरु और हैदराबाद से सीधी टक्कर
भारत के अन्य राज्य भी स्टार्टअप्स को लुभाने के लिए नई नीतियां ला रहे हैं। फिलहाल बेंगलुरु और हैदराबाद का दबदबा है, लेकिन दिल्ली अब अपनी पॉलिसी में टैक्स इंसेंटिव्स के साथ-साथ स्ट्रक्चरल सपोर्ट और फंड तक आसान पहुंच बनाने पर जोर दे रही है।
निवेशकों के लिए अहम सवाल
अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह पॉलिसी कागजों तक ही सीमित रहेगी या धरातल पर उतरेगी। अतीत में कई बार देखा गया है कि सरकारी वादों और जमीनी हकीकत में फर्क होता है। इन्वेस्टर्स और एंटरप्रेन्योर फिलहाल इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार रेड टेप (Red Tape) को कम करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
