Cars24 के IPO (Initial Public Offering) की राह में अचानक बड़ा मोड़ आ गया है। कंपनी के दो अहम को-फाउंडर्स, मेहुल अग्रवाल (COO) और गजेंद्र जांगिड़ (CMO), अपनी एग्जीक्यूटिव जिम्मेदारियों से हट गए हैं। यह फैसला तब लिया गया है जब कंपनी अगले 6 से 12 महीनों में पब्लिक मार्केट में एंट्री की तैयारी कर रही है और उसने हाल ही में अपनी पहली ग्लोबल प्रोफिटेबल तिमाही की घोषणा की है।
IPO से पहले लीडरशिप में फेरबदल
IPO से कुछ महीने पहले दो अहम को-फाउंडर्स का कंपनी के ऑपरेशनल हेड से हटना Cars24 की IPO कहानी को और जटिल बना रहा है। कंपनी जहाँ अपनी पहली ग्लोबल प्रोफिटेबल तिमाही और मजबूत होते फाइनेंशियल्स का जश्न मना रही है, वहीं इन फाउंडर्स के इस्तीफे ने निवेशकों का ध्यान कंपनी की लीडरशिप की स्थिरता और लॉन्ग-टर्म विजन पर खींचा है। कंपनी, जिसकी वैल्यूएशन $3.3 बिलियन (2021 में) थी, भारत के मजबूत IPO मार्केट का फायदा उठाना चाहती है, जहाँ अब प्रोफिटेबिलिटी और मजबूत गवर्नेंस वाली कंपनियों को तरजीह दी जा रही है।
प्रोफिटेबिलिटी और लीडरशिप: IPO के लिए कैसी है तैयारी?
Cars24 ने IPO से पहले अपनी प्रोफिटेबिलिटी की ओर रणनीतिक कदम बढ़ाया है। फाइनेंशियल ईयर 26 की पहली छमाही में कंपनी का एडजस्टेड नेट रेवेन्यू 18% बढ़कर ₹651 करोड़ रहा, और एडजस्टेड EBITDA लॉस में 36% की कमी आई। पहली ग्लोबल प्रोफिटेबल तिमाही, AI ऑटोमेशन से ऑपरेशनल एफिशिएंसी में बढ़त और होलसेल के बजाय हाई-मार्जिन रिटेल ट्रांजैक्शन पर फोकस, ये सब कंपनी को पब्लिक मार्केट के लिए तैयार करने के संकेत दे रहे हैं। हालांकि, को-फाउंडर्स मेहुल अग्रवाल और गजेंद्र जांगिड़ का डे-टू-डे जिम्मेदारियों से हटना अनिश्चितता पैदा कर रहा है। अग्रवाल बोर्ड में बने रहेंगे, जो उनकी रणनीतिक भागीदारी का संकेत देता है। लेकिन, IPO के इतने करीब प्रमुख फाउंडर्स का ऑपरेशनल मैनेजमेंट से दूर होना, निवेशकों द्वारा मजबूत लीडरशिप बेंच या प्री-IPO गवर्नेंस मैंडेट्स के जवाब के रूप में देखा जा सकता है।
यूज्ड-कार मार्केट और कॉम्पिटिशन
Cars24 भारत के तेजी से बढ़ते यूज्ड-कार मार्केट में काम करती है, जिसका अनुमान अगले दशक में $100 बिलियन तक पहुंचने का है। इस सेक्टर में Spinny, Droom और CarTrade Exchange जैसे 90 से ज्यादा प्लेयर मौजूद हैं। CarTrade Tech, इस स्पेस में अकेली लिस्टेड कंपनी है, जिसने 2025 में अच्छा स्टॉक परफॉरमेंस दिखाया है। Cars24 ने FY24 में ₹6,917 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, पर उसी पीरियड में ₹498 करोड़ का नेट लॉस भी रिपोर्ट किया।
इन्वेस्टर्स की नज़रें: फाउंडर एग्जिट और गवर्नेंस
IPO से ठीक पहले फाउंडर्स का ऑपरेशनल रोल्स से हटना, ख़ासकर जब लगभग 40% फाउंडर्स स्टार्टअप के पब्लिक होने से पहले चले जाते हैं, गवर्नेंस को लेकर सवाल खड़े करता है। हालांकि अग्रवाल का कहना है कि कंपनी एक 'इंफ्लेक्शन पॉइंट' पर है और लीडरशिप टीम मजबूत है, यह लीडरशिप ट्रांजिशन निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। निवेशक विजन की निरंतरता और बाकी एग्जीक्यूटिव टीम की गहराई की जांच करेंगे।
IPO की राह और ग्रोथ स्ट्रेटेजी
Cars24 का IPO अगले छह से बारह महीनों में बाजार की स्थितियों और रेगुलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करेगा। कंपनी की रिटेल ऑपरेशन्स, फाइनेंसिंग और ओनरशिप सर्विसेज पर फोकस बढ़ाने की रणनीति, उसे यूज्ड-कार मार्केट में ग्रोथ का फायदा उठाने में मदद करेगी। मैनेजमेंट को ₹750 करोड़ से अधिक के रेवेन्यू का अनुमान है। IPO की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी निवेशकों को अपनी लॉन्ग-टर्म गवर्नेंस, लीडरशिप स्थिरता और प्रोफिटेबिलिटी के बारे में कितना आश्वस्त कर पाती है।
