केरल के डीप-टेक स्टार्टअप Carbelim ने IIT Madras Unicorn Frontier Fund से **₹10 करोड़** की फंडिंग हासिल की है। कंपनी इस निवेश का उपयोग अपनी माइक्रोगैल्गी-आधारित कार्बन कैप्चर तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए करेगी।
केरल स्थित डीप-टेक कंपनी Carbelim ने IIT Madras Unicorn Frontier Fund के नेतृत्व में ₹10 करोड़ का निवेश राउंड पूरा किया है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य स्टार्टअप की प्रोपराइटरी माइक्रोगैल्गी-आधारित कार्बन कैप्चर और एयर प्यूरीफिकेशन तकनीक को लैब से निकालकर औद्योगिक स्तर (Industrial-scale) पर लाना है।
क्या है 'Liquid Trees' तकनीक?
कंपनी ने 'Liquid Trees' नाम से एक समाधान पेश किया है। ये यूनिट्स हवा से कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर ऑक्सीजन छोड़ने का काम करती हैं। कंपनी के पास अब तक भारत और अमेरिका में 13 पेटेंट रजिस्टर्ड हैं। इनका फोकस ऐसे मॉड्यूलर हार्डवेयर बनाने पर है जिन्हें शहरी केंद्रों और इंडस्ट्रियल जोन में आसानी से लगाया जा सके, ताकि प्रदूषित इलाकों में कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके।
हार्डवेयर स्केलिंग की चुनौती
सॉफ्टवेयर कंपनियों के मुकाबले हार्डवेयर-केंद्रित क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप्स को विस्तार में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। Carbelim के लिए असली चुनौती यह साबित करना है कि उनकी बायो-इंटीग्रेटेड प्रणाली पारंपरिक एयर प्यूरीफिकेशन तरीकों के मुकाबले कितनी किफायती है। कंपनी का लक्ष्य ₹100 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है, जिसके लिए उन्हें मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च लागतों को बेहद सावधानी से मैनेज करना होगा।
विस्तार की योजना
यह फंडिंग IIT Madras Research Park और Unicorn India Ventures के सहयोग से मिली है। इस पूंजी के साथ, फाउंडर्स कार्तिका गोपी और राहुल बाबू अपनी टीम में 50 नए लोगों को शामिल करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही, कंपनी अब उन अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी नजर रख रही है जहां औद्योगिक एयर प्यूरीफिकेशन की मांग तेजी से बढ़ रही है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी अपने पायलट प्रोजेक्ट्स को लंबे समय के कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट्स में कितनी कुशलता से बदल पाती है।
