फिटनेस ब्रांड Boldfit अपनी ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की तैयारी में है। कंपनी प्राइवेट इक्विटी फर्मों से ₹800 करोड़ (लगभग $100 मिलियन) तक की फंडिंग हासिल करने के लिए बातचीत कर रही है।
Boldfit जुटाएगा ₹800 करोड़?
भारत का तेजी से बढ़ता डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (DTC) फिटनेस ब्रांड Boldfit, अपनी विस्तार योजनाओं को पंख लगाने के लिए प्राइवेट इक्विटी (PE) से करीब $80 मिलियन से $100 मिलियन (लगभग ₹660 करोड़ से ₹830 करोड़) तक की फंडिंग जुटाने के लिए बातचीत कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य इस फंडिंग राउंड में ₹3,000 करोड़ से ₹4,000 करोड़ का वैल्यूएशन हासिल करना है।
BlIng Brands Pvt Ltd द्वारा संचालित यह ब्रांड, Avendus नामक निवेश बैंक की मदद से इस फंडरेज़िंग प्रोसेस को आगे बढ़ा रहा है। यह कदम भारत के हेल्थ और वेलनेस सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे अवसरों का फायदा उठाने के लिए उठाया जा रहा है।
दमदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
Boldfit ने फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹73.71 करोड़ की तुलना में लगभग दोगुना होकर ₹139.70 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, नेट प्रॉफिट भी FY24 के ₹15.71 करोड़ से बढ़कर ₹16.81 करोड़ हो गया है।
साल 2018 में Pallav Bihani और Aasshna Guptaa द्वारा स्थापित इस ब्रांड को पहले भी Bessemer Venture Partners और क्रिकेटर KL Rahul जैसे निवेशकों का साथ मिल चुका है।
बाजार की चुनौतियाँ और भविष्य की रणनीति
Boldfit एक बेहद कॉम्पिटिटिव मार्केट में काम कर रहा है, जहाँ उसे बड़े मल्टीनेशनल स्पोर्ट्स ब्रांड्स और कई भारतीय स्टार्टअप्स से कड़ी टक्कर मिल रही है। इस फंडिंग राउंड की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले अपनी ग्रोथ की रफ्तार को बनाए रख पाती है या नहीं।
कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती ऑम्नीचैनल स्ट्रैटेजी को सफलतापूर्वक लागू करना होगी। ई-कॉमर्स से ऑफलाइन रिटेल में विस्तार के लिए बड़े पूंजी निवेश और ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटी की आवश्यकता होगी। निवेशकों की नजरें इस बात पर होंगी कि कंपनी अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाते हुए कैसे विस्तार करती है।
आखिरी फैसला प्राइवेट इक्विटी फर्मों के कंज्यूमर-फेसिंग ब्रांड्स को लेकर मौजूदा सेंटिमेंट पर भी निर्भर करेगा। कंपनी का टारगेट वैल्यूएशन उसकी अनुमानित ग्रोथ रेट और ऑपरेशंस को स्केल करने की लागत को मैनेज करने की क्षमता पर टिका होगा।
