मुंबई की स्टार्टअप कंपनी Blue Lobster Media को आजकल नौकरी के लिए खूब एप्लीकेशन्स आ रही हैं। इसकी वजह है कंपनी के फाउंडर, ध्रुव मुखर्जी का वो वायरल फैसला, जिसमें उन्होंने एक कम प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी को डांटने-फटकारने के बजाय पेड लीव (Paid Leave) दी। यह फर्म B2B लीड जनरेशन पर फोकस करती है और इसमें एक छोटी सी टीम काम करती है।
कर्मचारी के साथ अनोखा बर्ताव
मुंबई की स्टार्टअप कंपनी Blue Lobster Media के फाउंडर ध्रुव मुखर्जी इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने अपने एक कर्मचारी, जो पिछले कुछ समय से अच्छा परफॉर्म नहीं कर पा रहा था, को स्टैंडर्ड चेतावनी या सैलरी कट (Salary Cut) देने के बजाय, पुणे की तीन दिन की पेड ट्रिप (Paid Trip) पर भेज दिया। यह कंटेंट ऑपरेशंस लीड, आर्या फडणीस के लिए था।
यह फैसला तब लिया गया जब मुखर्जी ने कंपनी के काम में देरी और क्वालिटी में गिरावट देखी। जांच करने पर पता चला कि कर्मचारी निजी समस्याओं से जूझ रहा था। आर्या फडणीस ने खुद लैप्स (Lapses) की जिम्मेदारी लेने के लिए सैलरी कट का सुझाव दिया था, लेकिन फाउंडर ने इसके बजाय छुट्टी का विकल्प चुना, इसे परफॉरमेंस फेलियर (Performance Failure) के बजाय एक अस्थायी रुकावट माना।
कंपनी पर पड़ा असर
फाउंडर के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद, Blue Lobster Media, जिसमें सिर्फ चार लोग काम करते हैं, को नौकरी के लिए एप्लीकेशन्स की बाढ़ आ गई है। इस पहल से जनरेट हुए इंटरेस्ट का फायदा उठाते हुए, कंपनी ने एक पोजीशन पहले ही भर दी है।
बिजनेस मॉडल और टीम
Blue Lobster Media, B2B लीड जनरेशन फनल (B2B Lead-generation Funnels) पर फोकस करती है। छोटी टीम के कारण, एक कर्मचारी का परफॉरमेंस पूरी कंपनी को काफी हद तक प्रभावित करता है। ऐसे में, लंबे समय से कंपनी के साथ जुड़े टैलेंटेड कर्मचारियों को बनाए रखना, नए लोगों को हायर (Hire) और ट्रेन करने से ज्यादा किफायती हो सकता है।
छोटे स्टार्टअप्स में मैनेजमेंट की रणनीति
जहां बड़ी कंपनियां परफॉरमेंस इंप्रूवमेंट प्लान (Performance Improvement Plan) या सख्त HR नीतियों पर निर्भर करती हैं, वहीं छोटे स्टार्टअप्स अक्सर पर्सनलाइज्ड सॉल्यूशंस (Personalized Solutions) के लिए ज्यादा फ्लेक्सिबल होते हैं। लीडरशिप स्टाइल, कंपनी कल्चर और रिटेंशन (Retention) पर कैसे असर डालती है, यह खासकर हाई-ग्रोथ या क्रिएटिव इंडस्ट्रीज में देखा जाता है, जहां टैलेंट ही सबसे बड़ी असेट (Asset) है। इस मामले में, फाउंडर के फैसले ने पॉजिटिव ब्रांडिंग (Positive Branding) के साथ-साथ टैलेंटेड लोगों का एक बड़ा पूल भी तैयार किया है। अब देखना यह होगा कि कंपनी नए लोगों को इंटीग्रेट (Integrate) करके अपनी ऑपरेशनल क्वालिटी को कैसे बनाए रखती है।
