भारतीय वेंचर कैपिटल फर्म AUM Ventures ने अपना दूसरा फंड, 'इंडिया इनोवेशन फंड II', लॉन्च कर दिया है। यह फंड **$80 मिलियन** यानी करीब **₹750 करोड़** का होगा, जिसका लक्ष्य अगले पांच सालों में स्पेस, AI, डिफेंस और सेमीकंडक्टर जैसे डीपटेक सेक्टर्स में **25-30** शुरुआती स्टेज की स्टार्टअप्स को सपोर्ट करना है।
डीपटेक में निवेश का नया अध्याय
भारतीय वेंचर कैपिटल फर्म AUM Ventures ने अपना दूसरा फंड, 'इंडिया इनोवेशन फंड II', लॉन्च करने की घोषणा की है। इस फंड का कुल आकार ₹750 करोड़ (लगभग $80 मिलियन) रखा गया है, जो खास तौर पर डीप टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली शुरुआती स्टेज की स्टार्टअप्स में निवेश करेगा। यह SEBI रजिस्टर्ड कैटेगरी II अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड है।
यह फंड अगले 5 सालों में 25 से 30 कंपनियों को सपोर्ट करने की योजना बना रहा है। AUM Ventures का मुख्य फोकस स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स पर रहेगा। फर्म ऐसे भारतीय फाउंडर्स की तलाश में है जो ऐसे प्रोडक्ट्स बना रहे हैं जिनमें ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता हो और जो इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) पर आधारित हों।
निवेश की रणनीति और जोखिम
शुरुआती निवेश के तौर पर, फंड प्रति कंपनी $750,000 से लेकर $2 मिलियन तक की राशि देगा। इसके अलावा, फंड स्ट्रक्चर भविष्य में सीरीज A और सीरीज B जैसे राउंड्स में फॉलो-ऑन निवेश की भी अनुमति देता है। इस नए फंड के निवेश की कमान निशा शाह संभालेंगी, जो पहले नरोत्तम सेखसरिया फैमिली ऑफिस में स्ट्रेटेजी का हिस्सा थीं। वहीं, फाउंडिंग पार्टनर चेता मेहता को उम्मीद है कि फंड का पहला क्लोज जुलाई 2026 में होगा।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि डीपटेक में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। कंज्यूमर इंटरनेट या SaaS कंपनियों के विपरीत, डीपटेक स्टार्टअप्स का रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) साइकिल काफी लंबा होता है। इसका मतलब है कि पैसा लगाने और प्रोडक्ट या रेवेन्यू जेनरेट करने के बीच का समय बहुत अधिक हो सकता है। शुरुआती स्टेज में विफलता का जोखिम भी अधिक होता है। हार्डवेयर या जटिल AI मॉडल विकसित करने में भारी पूंजी लगती है, और यदि तकनीक बाजार में सफल नहीं होती है या तकनीकी बाधाओं का सामना करती है, तो निवेशित पूंजी का नुकसान हो सकता है।
सरकारी सहयोग और कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड
इस लॉन्च का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत सरकार उन्नत टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' जैसी पहलें और बड़े पैमाने पर R&D पर जोर, इन सेक्टर्स के लिए एक सहायक माहौल बनाने का लक्ष्य रखते हैं। सरकार डीपटेक स्टार्टअप्स के लिए पहचान की उम्र बढ़ाने और टर्नओवर की सीमाएं बढ़ाने जैसे कदम उठाकर प्रवेश बाधाओं को कम करने की कोशिश कर रही है।
AUM Ventures ने 2022 में अपनी स्थापना के बाद से इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने अब तक लगभग $30 मिलियन 24 शुरुआती स्टेज की कंपनियों में निवेश किए हैं। उनके पोर्टफोलियो में स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो एक सफल स्पेस-टेक फर्म है, और एजिमुथ AI (Azimuth AI) जो सेमीकंडक्टर स्पेस में काम करती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
वेंचर कैपिटल स्पेस को ट्रैक करने वाले निवेशकों के लिए, इस फंड के पूंजी आवंटन की प्रगति पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा। ऐसे फंड की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे कितनी अच्छी तरह से नवाचार और व्यावसायिक व्यवहार्यता के बीच की खाई को पाट सकने वाली स्टार्टअप्स की पहचान कर पाते हैं। निवेशक जुलाई 2026 में होने वाले पहले क्लोज की घोषणा का भी इंतजार करेंगे, जो निवेश के लिए उपलब्ध वास्तविक पूंजी की पुष्टि करेगा। फंड मैनेजरों की वह क्षमता जो कंपनियों को लगातार बाहरी फंडिंग पर निर्भर हुए बिना स्केल करने में मदद कर सके, उनकी रणनीति का अंतिम परीक्षण होगी।
