ASK Hurun Cheetah Index 2026: देश की 110 स्टार्टअप्स में छिपा है अगला 'Unicorn', कुल वैल्यूएशन **₹3 लाख करोड़** के पार

STARTUPSVC
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
ASK Hurun Cheetah Index 2026: देश की 110 स्टार्टअप्स में छिपा है अगला 'Unicorn', कुल वैल्यूएशन **₹3 लाख करोड़** के पार

2026 ASK Private Wealth Hurun India Cheetah Index में भारत की 110 ऐसी हाई-ग्रोथ स्टार्टअप्स की लिस्ट जारी की गई है, जिनकी कुल वैल्यूएशन **₹3 लाख करोड़** है। यह डेटा आने वाले समय में बाजार में आने वाली नई कंपनियों का एक बड़ा संकेत है।

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है। ताज़ा इंडेक्स में ऐसी 110 कंपनियों की पहचान की गई है, जिनकी वर्तमान वैल्यूएशन $200 मिलियन से $500 मिलियन के बीच है। 'चीता' (Cheetahs) कही जाने वाली इन कंपनियों की संख्या साल 2021 के मुकाबले दोगुनी हो चुकी है। ये स्टार्टअप्स 1.10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहे हैं।\n\n### शिक्षा और इनोवेशन का तालमेल\n\nइस इंडेक्स में एक बड़ा ट्रेंड संस्थापकों की शैक्षिक पृष्ठभूमि को लेकर दिखा है। अंडरग्रेजुएट स्तर पर IIT Madras टॉप पर है, जिसके बाद IIT Bombay और University of Delhi का नंबर आता है। पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर पर IIM Ahmedabad, Indian School of Business और IIM Lucknow का दबदबा रहा है। इससे साफ है कि देश के प्रीमियम इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थान स्टार्टअप्स की नर्सरी बने हुए हैं।\n\n### सेक्टर और लोकेशन का गणित\n\nअगर सेक्टर की बात करें, तो FinTech में सबसे ज्यादा 17 कंपनियां हैं, इसके बाद SaaS में 16 और ई-कॉमर्स में 12 कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, अब स्टार्टअप्स का रुख क्लीन टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे जटिल क्षेत्रों की ओर मुड़ रहा है। भौगोलिक रूप से स्टार्टअप्स का जाल बेंगलुरु (36 कंपनियां), NCR (25 कंपनियां) और मुंबई (16 कंपनियां) में केंद्रित है।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी\n\nनिवेशकों के नजरिए से, ये 'चीता' कंपनियां भविष्य के अनकॉर्न (Unicorn) बनने की क्षमता रखती हैं। इनमें से कई कंपनियां पहले ही गजेल (Gazelle) या यूनिकॉर्न का दर्जा पा चुकी हैं, और कुछ ने तो शेयर बाजार में लिस्टिंग भी कर ली है। लेकिन, रिटेल निवेशकों को यह समझना होगा कि ये कंपनियां अभी अनलिस्टेड (Unlisted) और प्राइवेट हैं। इनमें लिक्विडिटी की कमी होती है और ये कंपनियां अक्सर भारी कैश-बर्न (Cash-burn) के दौर से गुजर रही होती हैं। इनका भविष्य पूरी तरह से इनकी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केट में बने रहने की क्षमता पर टिका है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.