AI का जलवा: भारत के स्टार्टअप्स में अब नए फाउंडर्स की राह आसान, अनुभव पर भारी!

STARTUPSVC
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
AI का जलवा: भारत के स्टार्टअप्स में अब नए फाउंडर्स की राह आसान, अनुभव पर भारी!
Overview

भारत के स्टार्टअप जगत में बड़ा बदलाव आ गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने अब पहली बार बिज़नेस शुरू करने वाले नए फाउंडर्स (Founders) को वो ताकत दी है, जो पहले अनुभवी फाउंडर्स के पास होती थी।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

पहले भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में अक्सर उन फाउंडर्स को तरजीह मिलती थी जिन्होंने पहले भी बिज़नेस शुरू किया हो। ऐसा माना जाता था कि उनके पास मार्केट की समझ, फंड जुटाने की क्षमता और ऑपरेशन चलाने का अनुभव होता है। आंकड़े भी बताते थे कि ऐसे अनुभवी फाउंडर्स ने बड़े स्टार्टअप्स (Unicorns) बनाने में ज्यादा सफलता पाई है। हालांकि, Flipkart, Razorpay, और Zepto जैसे सफल फर्स्ट-टाइम फाउंडर्स ने साबित किया है कि अनुभव की कमी के बावजूद भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। लेकिन, AI के आने से यह तस्वीर तेजी से बदल रही है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने एंटरप्रेन्योरशिप (Entrepreneurship) को अब और ज्यादा सुलभ बना दिया है। खास तौर पर जेनरेटिव AI (Generative AI) का इस्तेमाल बढ़ रहा है। अब 70% से ज्यादा भारतीय टेक स्टार्टअप्स AI का प्रयोग कर रहे हैं। AI टूल्स की मदद से छोटे या सिंगल फाउंडर वाली टीमें भी ऐसे प्रोडक्ट्स बना सकती हैं, जिनके लिए पहले बड़ी और ज्यादा फंड वाली कंपनियों की जरूरत पड़ती थी। इससे कम रिसोर्स के साथ भी तेज़ी से काम करना और प्रोडक्ट बनाना संभव हो गया है।

इस AI-पावर्ड एजिलिटी (Agility) के चलते वेंचर कैपिटलिस्ट (Venture Capitalists) अब नए फाउंडर्स की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। वे ऐसे AI-नेटिव (AI-native) स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दे रहे हैं जो तेज़ी से आगे बढ़ सकें। Razorpay जैसे प्लेटफॉर्म पेमेंट और मर्चेंट सर्विसेज को बेहतर बनाने के लिए AI का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं Flipkart भी अपने ई-कॉमर्स सिस्टम में पर्सनलइज्ड ग्राहक सुझावों से लेकर लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने तक हर जगह AI को इंटीग्रेट कर रहा है। अनुमान है कि AI स्टार्टअप्स को मिलने वाला VC फंडिंग का हिस्सा 2025 तक करीब 12.3% तक पहुंच सकता है।

हालांकि, AI की राह में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। AI की क्षमता को असली, लाभदायक बिज़नेस रिजल्ट्स में बदलना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। वीसी (VCs) अब 'AI रैपर' (AI wrapper) यानी सिर्फ AI टूल्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों और असली AI-आधारित कंपनियों के बीच फर्क करने लगे हैं। साथ ही, गहरे ऑपरेशनल अनुभव, जटिल रेगुलेशन, मजबूत सप्लाई चेन बनाने और लंबी अवधि के ग्रोथ को संभालने जैसे काम अभी भी अनुभवी फाउंडर्स के लिए आसान हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, आज के दौर में निवेशक AI स्किल्स, तेज़ी से बदलने की क्षमता और ग्लोबल एंबीशन (Global Ambition) रखने वाले फाउंडर्स को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। अनुभव अभी भी मायने रखता है, लेकिन AI का प्रभावी इस्तेमाल और आक्रामक ग्रोथ की चाहत ही अगले सफल स्टार्टअप्स की पहचान बनेगी।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.