AI का पावर, पर निवेशकों की पहली पसंद 'टिकाऊ ग्रोथ'

STARTUPSVC
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
AI का पावर, पर निवेशकों की पहली पसंद 'टिकाऊ ग्रोथ'
Overview

आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से स्टार्टअप्स अपने रेवेन्यू (Revenue) को पिछले मुकाबले कहीं तेजी से बढ़ा रहे हैं। ये कंपनियां तेजी से एनुअल रिकरिंग रेवेन्यू (ARR) के बड़े माइलस्टोन पार कर रही हैं। हालांकि, इस तेज रफ्तार के बीच, इन्वेस्टर्स अब सिर्फ स्पीड पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाली ग्रोथ (Durable Growth) और प्रॉफिट (Profit) को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।

AI का दबदबा: स्टार्टअप्स की ग्रोथ में आई तूफानी तेजी

स्ट्राईप (Stripe) की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, AI का इस्तेमाल कंपनियों के काम करने और प्रोडक्ट बेचने के तरीके में क्रांति ला रहा है। साल 2025 में स्ट्राइप प्लेटफॉर्म पर नई कंपनियों के जुड़ने की रफ्तार रिकॉर्ड तोड़ रही है। इनमें से 57% कंपनियाँ अमेरिका के बाहर की हैं। इन नई कंपनियों की ग्रोथ पिछले साल वालों की तुलना में 50% तेज है। सबसे खास बात यह है कि 2025 में, तीन महीने के अंदर $10 मिलियन ARR का आंकड़ा छूने वाले स्टार्टअप्स की संख्या 2024 के मुकाबले दोगुनी हो गई। स्ट्राइप एटलस (Stripe Atlas) के जरिए बने स्टार्टअप्स भी तेजी से कमाई कर रहे हैं, जहाँ 20% कंपनियों ने पहले ग्राहक से पेमेंट 30 दिन के अंदर ही ले ली, जबकि 2020 में यह आंकड़ा सिर्फ 8% था। AI ऑटोमेशन, ऑप्टिमाइजेशन और स्केलिंग में मदद करके इन नए वेंचर्स के लिए मार्केट में आने का समय काफी कम कर रहा है। कुल मिलाकर, पेमेंट प्रोसेसिंग मार्केट, जिसका वैल्यू 2024 में $66.8 बिलियन था, ई-कॉमर्स और AI जैसी टेक्नोलॉजी के कारण तेजी से बढ़ रहा है, जो इन तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स के लिए उपजाऊ जमीन तैयार कर रहा है। स्ट्राइप की अपनी वैल्यूएशन फरवरी 2026 तक $159 बिलियन तक पहुँच गई, जो 2025 में प्रोसेस किए गए $1.9 ट्रिलियन टोटल वॉल्यूम के कारण संभव हुआ, जो पिछले साल से 34% ज्यादा है।

एनालिटिकल फोकस: 'टिकाऊ ग्रोथ' बनाम 'रफ्तार'

इन शानदार ARR आंकड़ों के बावजूद, इन्वेस्टर्स अब अपना फोकस बदल रहे हैं। 'कुछ भी करके ग्रोथ करो' (Growth at all costs) का दौर खत्म हो रहा है और अब 'टिकाऊ ग्रोथ' (Durable Growth) पर जोर दिया जा रहा है। टिकाऊ ग्रोथ का मतलब है लगातार रेवेन्यू बढ़ाना और साथ ही प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखना। वेंचर कैपिटलिस्ट्स (Venture Capitalists) अब सिर्फ टॉप-लाइन की रफ्तार से आगे बढ़कर मजबूत यूनिट इकोनॉमिक्स (Unit Economics), कम कस्टमर चर्न (Customer Churn) और लंबे समय तक टिकने वाले कस्टमर के सबूत मांग रहे हैं, जैसे कि छोटे पायलट प्रोजेक्ट के बजाय मल्टी-ईयर कॉन्ट्रैक्ट। इस बदलाव की एक बड़ी वजह मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल है, जहाँ ब्याज दरें (Interest Rates) काफी बढ़ गई हैं। फरवरी 2025 तक, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की 4.25% से 4.5% की ब्याज दरें कैपिटल को महंगा बना रही हैं। ऐतिहासिक रूप से, ब्याज दरों में 1% की बढ़ोतरी ने वेंचर कैपिटल फंडरेज़िंग (VC Fundraising) में 3.2% की गिरावट देखी गई है। ऐसे माहौल में, स्टार्टअप्स के लिए सिर्फ तेजी से बढ़ना ही काफी नहीं, बल्कि उस ग्रोथ को बनाए रखने की क्षमता और एफिशिएंसी दिखाना भी जरूरी है।

⚠️ जोखिम: कहीं 'AI बूम' साबित न हो जाए हवा-हवाई

AI से प्रेरित ARR ग्रोथ की यह मौजूदा तेजी, जो बहुत आकर्षक लग रही है, अपने साथ कुछ खास जोखिम भी लेकर आई है। इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ अटकलों पर आधारित AI खर्चों और एक्सपेरिमेंटल रेवेन्यू के कारण हो सकता है, न कि ठोस, बार-बार आने वाली कमाई के कारण। कई AI-नेटिव कंपनियों में ट्रेडिशनल SaaS बिजनेस की तुलना में कस्टमर चर्न की दरें ज्यादा देखी जा रही हैं, जिससे उन्हें लगातार नए यूजर लाने का दबाव बना रहता है। यह 'AI टूरिस्ट' फेनोमेनन, जहाँ यूजर नए टूल्स को आजमा कर आगे बढ़ जाते हैं, एक बड़ी 'ग्रॉस रिटेंशन एपोकैलिप्स' (Gross Retention Apocalypse) का कारण बन सकता है। इसके अलावा, AI से जुड़े हाई कम्प्यूटेशनल कॉस्ट (High Computational Costs) यूनिट इकोनॉमिक्स पर भारी पड़ सकते हैं, खासकर उन कंपनियों के लिए जो पहले से ही निगेटिव मार्जिन पर काम कर रही हैं। अगर फंडिंग टाइट हो जाती है या AI खर्चों का पीक आ जाता है, तो वे आसानी से खतरे में पड़ सकती हैं। ऐतिहासिक रूप से, अत्यधिक हाइप (Hype) और तेज, बिना प्रॉफिट वाली ग्रोथ के बाद बाजार में करेक्शन (Correction) आता रहा है। AI स्टार्टअप्स का वर्तमान माहौल, जहाँ वैल्यूएशन कुछ ही महीनों में दोगुनी हो रही है, मौजूदा बेंचमार्क की टिकाऊपन पर सवाल खड़े करता है। बड़ी कंपनियों द्वारा कई छोटे AI टूल्स का अधिग्रहण करने का ट्रेंड भी इंडिपेंडेंट स्टार्टअप्स के लिए एक खतरा पैदा करता है, जिससे मार्केट शेयर कंसॉलिडेट (Consolidate) होता है और कॉम्पिटिटिव मोट (Competitive Moat) कमजोर होता है।

भविष्य का नज़रिया

साल 2026 जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, इन्वेस्टर्स अनुमानित संभावनाओं के बजाय ठोस नतीजों और साबित बिजनेस मॉडल की मांग कर रहे हैं। AI की ट्रांसफॉर्मेटिव क्षमताएं निर्विवाद हैं, लेकिन मार्केट अब असली यूटिलिटी और इकोनॉमिक कॉन्ट्रिब्यूशन के आकलन की ओर बढ़ रहा है। जो पारंपरिक इंडस्ट्रीज पहले टेक्नोलॉजी अपनाने में धीमी थीं, वे अब AI को उत्सुकता से अपना रही हैं, जो टेक्नोलॉजी के सिर्फ niche सेक्टर से आगे बढ़कर व्यापक इंटीग्रेशन का संकेत देता है। AI स्टार्टअप्स का फोकस अब एक्सपेरिमेंटेशन से हटकर क्लियर ROI (Return on Investment) और ऑपरेशनल लिवरेज (Operational Leverage) दिखाने पर केंद्रित हो रहा है। यह ट्रेंड आने वाले साल में फंडिंग डायनामिक्स और वैल्यूएशन मैट्रिक्स को नया आकार देगा।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.