IIT Mandi की एक नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। सर्वे के मुताबिक, भारत के **22%** कॉलेज छात्र अपना खुद का स्टार्टअप चला रहे हैं। यह आंकड़ा वैश्विक स्तर के **23%** के बेहद करीब है, जो दिखाता है कि युवा अब कॉरपोरेट या सरकारी नौकरी के बजाय रिस्क लेने और बिजनेस करने में ज्यादा रुचि ले रहे हैं।
बदलती सोच और करियर की नई दिशा
IIT Mandi, REVA University और GUESSS India द्वारा किए गए इस बड़े अध्ययन में 25,000 से ज्यादा छात्रों को शामिल किया गया। इसमें 1,200 शिक्षण संस्थानों का डेटा लिया गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि भारतीय शिक्षा जगत में करियर को लेकर नजरिया तेजी से बदल रहा है।
सरकारी और कॉर्पोरेट नौकरियों का क्रेज घटा
सर्वे में यह साफ तौर पर दिखा है कि पारंपरिक करियर रास्तों में छात्रों की दिलचस्पी कम हो रही है। साल 2023 से 2025 के बीच सरकारी नौकरी चाहने वाले छात्रों की संख्या 12.7% से गिरकर 10.1% रह गई है। वहीं, बड़ी कंपनियों में कॉर्पोरेट जॉब्स पाने की चाहत भी 31.3% से घटकर 27.4% पर आ गई है। इसके उलट, 43% छात्र अब अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की इच्छा रखते हैं।
छात्रों का जुनून और लचीलापन
छात्र उद्यमियों की सबसे बड़ी ताकत उनका 'कभी हार न मानना' है। सर्वे के अनुसार:
- 41% फाउंडर्स ऐसे हैं जिन्होंने पहले किसी वेंचर के फेल होने के बाद दोबारा नई शुरुआत की है।
- 42% छात्र फाउंडर्स एक साथ दो या उससे ज्यादा बिजनेस संभाल रहे हैं।
- 31% स्टार्टअप्स, जो आज रेगुलर रेवेन्यू कमा रहे हैं, उन्हें केवल 2025 के कैलेंडर ईयर में ही शुरू किया गया था।
इकोसिस्टम पर असर
अब केवल डिजिटल बिजनेस तक ही छात्रों की सोच सीमित नहीं है। सिर्फ 10% स्टूडेंट-लेड फर्म्स पूरी तरह डिजिटल हैं, बाकी अन्य सेक्टरों में भी प्रयोग कर रहे हैं। आने वाले समय में, यह ट्रेंड बड़ी कंपनियों की हायरिंग पॉलिसी और वेंचर कैपिटल फंडिंग के तौर-तरीकों को प्रभावित कर सकता है। कैंपस इन्क्यूबेटर्स के बढ़ते प्रभाव से अब पढ़ाई और बिजनेस एग्जीक्यूशन के बीच की दूरी कम होती जा रही है।
