सिंगापुर की वेंचर बिल्डर कंपनी 100x100 ने अपना दूसरा फंड लॉन्च किया है। इस **$100 मिलियन (लगभग ₹830 करोड़)** के फंड का लक्ष्य अगले कुछ सालों में भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में **50** नई क्लाइमेट-फोक्स्ड कंपनियों को खड़ा करना है।
फंड का उद्देश्य और फोकस
100x100 का यह नया फंड खासतौर पर उन सेक्टर्स पर ध्यान देगा जो बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसमें बायोएनर्जी, एफिशिएंट कूलिंग सॉल्यूशंस और लॉजिस्टिक्स ऑप्टिमाइजेशन जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य है कि इस फंड के जरिए बनने वाली हर कंपनी 100 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करे और $100 मिलियन (लगभग ₹830 करोड़) का सालाना रेवेन्यू हासिल करे।
वेंचर बिल्डिंग का अनोखा मॉडल
100x100 का तरीका बाकी वेंचर कैपिटल फर्मों से बिल्कुल अलग है। ये फर्म मौजूदा स्टार्टअप्स में पैसा लगाने के बजाय, खुद उद्यमियों के साथ मिलकर बिल्कुल नए बिजनेस खड़ी करती हैं। इसे 'वेंचर बिल्डिंग' मॉडल कहा जाता है। इस मॉडल में, 100x100 कंपनी के को-फाउंडर की भूमिका निभाती है और अपने पोर्टफोलियो कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी रखती है।
कंपनी का दावा है कि इस अनोखे तरीके से उनके पोर्टफोलियो में कंपनियों के टिके रहने की दर इंडस्ट्री एवरेज से लगभग दोगुनी है। साथ ही, ये कंपनियाँ पारंपरिक वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप्स की तुलना में 1.5 गुना ज्यादा कैपिटल एफिशिएंट साबित हुई हैं।
पिछला ट्रैक रिकॉर्ड और बड़े निवेशकों का भरोसा
यह लॉन्च 100x100 के पहले फंड की सफलता के बाद आया है, जिसने 2023 में $60 मिलियन (लगभग ₹500 करोड़) का फंड पूरी तरह से सब्सक्राइब किया था। पहले फंड में U.S. Development Finance Corporation (DFC), Singapore Economic Development Board (EDB), और British International Investment (BII) जैसे बड़े इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस ने निवेश किया था, जो कंपनी की विश्वसनीयता को दर्शाता है।
अपने शुरुआती दिनों से, 100x100 आठ देशों में 27 कंपनियाँ खड़ी कर चुकी है। कंपनी के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर कंपनियाँ लॉन्च के 6 महीने के भीतर ही रेवेन्यू जेनरेट करने लगी थीं और अब तक उन्हें $28 मिलियन (लगभग ₹230 करोड़) से ज़्यादा की एक्सटर्नल फंडिंग मिल चुकी है।
क्लाइमेट टेक पर बढ़ता फोकस
क्लाइमेट टेक, खासकर बायोएनर्जी और लॉजिस्टिक्स में 100x100 का फोकस इस बात का संकेत है कि अब पर्यावरण पर असर और आर्थिक प्रदर्शन एक दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं। कंपनी का मानना है कि मुनाफा और कार्बन कटौती कोई विरोधाभास नहीं, बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं। यानी, जो कंपनियाँ एनर्जी या लॉजिस्टिक्स में एफिशिएंसी लाती हैं, उनकी मार्केट में अच्छी मांग होती है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
यह फंड सीधे तौर पर प्राइवेट इक्विटी से जुड़ा है, लेकिन 100x100 के पोर्टफोलियो का विकास भारतीय क्लाइमेट टेक स्टार्टअप्स के परिपक्व होने का एक पैमाना है। इस स्पेस पर नजर रखने वाले निवेशकों को इन कंपनियों की शुरुआती 'को-बिल्डिंग' फेज से आगे बढ़कर स्केल करने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। 50 कंपनियों को सफलतापूर्वक स्केल करने के लिए लगातार ऑपरेशनल एक्सपर्टाइज और शुरुआती फंडिंग सपोर्ट पर ही निर्भर न रहकर ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता सबसे बड़ी चुनौती होगी। इस फंड की असली सफलता इसी बात से मापी जाएगी कि कितनी स्टार्टअप्स शुरुआती वेंचर से निकलकर टिकाऊ, रेवेन्यू-जेनरेटिंग बिजनेस बन पाती हैं।
