भारत में पैडल (Padel) का बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है, और साल 2036 तक इसके दस गुना होने का अनुमान है। कॉर्पोरेट फंडिंग और सेलेब्रिटीज़ के सपोर्ट से इस खेल के लिए कोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज़ी से विस्तार हो रहा है। इन्वेस्टर इस पर नज़र बनाए हुए हैं कि यह नया खेल कैसे टिकाऊ फ्रेंचाइजी लीग और लंबी अवधि के रेवेन्यू मॉडल में बदल सकता है।
क्या है खास?
पैडल, जो टेनिस और स्क्वैश का मिश्रण है, भारत में तेज़ी से फैल रहा है। यह खेल अब सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक बड़ा कमर्शियल अवसर बनता दिख रहा है। वर्तमान में इस मार्केट का वैल्यूएशन $25-30 मिलियन है। इस ग्रोथ में JSW Sports (Parth Jindal) और MS Dhoni की 7Padel जैसी बड़ी कंपनियों का बड़ा हाथ है। इन दोनों ने मिलकर PadelPark India नाम का एक प्लेटफार्म बनाया है, जिसका मकसद एक प्लान्ड सिटी-बेस्ड फ्रेंचाइजी लीग के ज़रिए खेल को व्यवस्थित करना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की इकोनॉमी
पारंपरिक खेलों के विपरीत, पैडल का विकास ज़्यादातर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट से हो रहा है। इंडिया पैडल रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 2023 में जहां सिर्फ 100 कोर्ट थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 500 हो गई है। एक कोर्ट बनाने में करीब ₹15-20 लाख का कैपिटल एक्सपेंडिचर आता है। यह लागत बड़े स्टेडियम या स्विमिंग पूल कॉम्प्लेक्स की तुलना में काफी कम है, जिससे यह जिम मालिकों, रियल एस्टेट डेवलपर्स और स्पोर्ट्स क्लबों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन गया है।
लीग की रणनीति
कंपनियां प्रो कबड्डी लीग की सफलता को दोहराकर इस खेल को मुख्यधारा में लाना चाहती हैं। इसके लिए फ्रेंचाइजी मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिससे टीवी और डिजिटल मीडिया रेवेन्यू आकर्षित हो सके। शहर-आधारित टीमें बनाकर, प्रमोटर स्थानीय जुड़ाव और खेल की पहचान बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। लक्ष्य है कि कैज़ुअल खेलने के अनुभव को एक दर्शक-केंद्रित उत्पाद में बदला जाए, जो किसी भी खेल के लिए लॉन्ग-टर्म एडवरटाइजिंग और स्पॉन्सरशिप आय उत्पन्न करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
बिजनेस की चुनौतियाँ और जोखिम
हालांकि ग्रोथ के अनुमान बड़े हैं, लेकिन कई चुनौतियां भी हैं। भारत के बड़े शहरों में रियल एस्टेट की ऊंची कीमतें और ज़मीन की कमी एक बड़ी समस्या है। अगर कोर्ट रेंटल्स बहुत ज़्यादा हुए, तो यह खेल सिर्फ अमीर वर्ग तक सीमित रह सकता है, जिससे इसकी मास अपील पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, लीग के लिए एक टिकाऊ फैन बेस बनाना मुश्किल है। कई स्पोर्ट्स लीग्स भारत में शुरुआती क्रेज़ खत्म होने के बाद दर्शकों को बनाए रखने में संघर्ष करती हैं। क्रिकेट के विपरीत, जिसे गहरी सांस्कृतिक जड़ें मिली हुई हैं, पैडल को कैज़ुअल प्लेयर्स को स्थायी दर्शकों में बदलने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह लीग बड़े ब्रॉडकास्टर्स और स्पॉन्सर्स को आकर्षित करने में सफल होती है, जो इसकी कमर्शियल व्यवहार्यता की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
इन्वेस्टर क्या ट्रैक करें
स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में रुचि रखने वाले इन्वेस्टर को आने वाली फ्रेंचाइजी लीग के लॉन्च और प्रदर्शन पर नज़र रखनी चाहिए। मुख्य बिंदु होंगे: लीग्स ब्रॉडकास्टिंग राइट्स हासिल कर पाती हैं या नहीं, नए कोर्ट्स पर ऑक्यूपेंसी रेट्स क्या हैं, और कोर्ट्स की संख्या बढ़ने के साथ-साथ खेल में खिलाड़ियों का रिटेंशन कैसा रहता है। इसके अलावा, कोर्ट रेंटल्स की औसत लागत पर नज़र रखने से यह समझने में मदद मिलेगी कि यह खेल ज़्यादा सुलभ हो रहा है या एक प्रीमियम, निश एक्टिविटी बना हुआ है।
