मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में **48kg** वेटलिफ्टिंग कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता है, जिसमें उन्होंने स्नैच (Snatch) और क्लीन एंड जर्क (Clean & Jerk) दोनों में नए रिकॉर्ड बनाए। उनकी लगातार जीतों ने भारत में ओलंपिक लिफ्टिंग तकनीकों में रुचि बढ़ाई है, और एथलीट्स व फिटनेस के शौकीन लोगों के बीच प्रोफेशनल स्ट्रेंथ (Strength) और कंडीशनिंग ट्रेनिंग पर फोकस बढ़ा है।
मीराबाई चानू ने फिर दिखाया दम
मीराबाई चानू ने हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स की 48kg वेटलिफ्टिंग कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर खेल में अपनी धाक जमाई है। उन्होंने स्नैच (Snatch) में 85kg और क्लीन एंड जर्क (Clean & Jerk) में 105kg उठाकर नए कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड अपने नाम किए। यह प्रतियोगिता में उनकी लगातार तीसरी गोल्ड मेडल जीत है, जो 2018 के गोल्ड कोस्ट गेम्स में उनकी पिछली जीत की याद दिलाती है।
भारतीय वेटलिफ्टिंग दल का शानदार प्रदर्शन
भारतीय वेटलिफ्टिंग दल की इस बड़ी कामयाबी ने खेल की प्रोफेशनल ट्रेनिंग के तरीकों पर भी ध्यान खींचा है। दल ने कुल छह सिल्वर मेडल और एक ब्रॉन्ज मेडल भी जीता है। हालांकि यह सफलता मुख्य रूप से कॉम्पिटिटिव (Competitive) खेल के क्षेत्र में है, लेकिन इसने भारत के बड़े फिटनेस मार्केट में स्ट्रेंथ (Strength) और कंडीशनिंग को देखने के नजरिए को बदल दिया है। अब इस क्षेत्र के एक्सपर्ट्स का मानना है कि ओलंपिक लिफ्टिंग मूवमेंट्स (Olympic Lifting Movements) विस्फोटक पावर, रॉ स्ट्रेंथ (Raw Strength) और शारीरिक मजबूती के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
खास ट्रेनिंग के फायदे
ओलंपिक लिफ्टिंग की तकनीकों, खासकर स्नैच (Snatch) और क्लीन एंड जर्क (Clean & Jerk) को अब कई टॉप भारतीय एथलीट्स के ट्रेनिंग रूटीन में शामिल किया जा रहा है। कोचों का कहना है कि ये लिफ्ट्स मांसपेशियों, कनेक्टिव टिशूज (Connective Tissues) और जोड़ों को मजबूत बनाते हैं, जिससे अलग-अलग खेलों में चोट लगने का खतरा कम होता है। इस तरह की ट्रेनिंग का इस्तेमाल आजकल ट्रैक एंड फील्ड से लेकर क्रिकेट जैसे हाई-इंटेंसिटी (High-Intensity) वाले खेलों में भी हो रहा है। प्रोफेशनल उत्कृष्टता हासिल करने वालों के लिए इस तरह की कठोर और टेक्निकल ट्रेनिंग को एक स्टैंडर्ड माना जा रहा है।
टेक्निकल स्किल कैसे बढ़ाएं?
जो लोग इन ट्रेनिंग मेथड्स को अपनाना चाहते हैं, एक्सपर्ट्स एक स्ट्रक्चर्ड (Structured) और लंबे समय तक चलने वाले अप्रोच की सलाह देते हैं। आमतौर पर, शुरुआत स्ट्रेंथ (Strength) और स्टेबिलिटी (Stability) बनाने के लिए स्क्वैट्स (Squats) और डेडलिफ्ट्स (Deadlifts) जैसे बेसिक मूवमेंट्स से की जाती है। इन फाउंडेशनल एक्सरसाइजेज (Foundational Exercises) में महारत हासिल करने के बाद ही कोच स्नैच (Snatch) और क्लीन एंड जर्क (Clean & Jerk) के टेक्निकल एस्पेक्ट्स (Technical Aspects) पर आगे बढ़ने की सलाह देते हैं। यह प्रोग्रेसिव मॉडल (Progressive Model) चोट के खतरे को कम करते हुए मैक्सिमम गेन (Maximum Gain) दिलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जैसे-जैसे भारत में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, प्रोफेशनल एथलीट्स और फिटनेस के शौकीनों, दोनों के लिए लंबी अवधि के फिजिकल हेल्थ (Physical Health) और परफॉर्मेंस गेन्स (Performance Gains) को सुनिश्चित करने के लिए सुपरवाइज्ड ट्रेनिंग (Supervised Training) और धीरे-धीरे वेट बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया जा रहा है।
