नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा: 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य, EFTA डील बनी बड़ी वजह

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AuthorMehul Desai|Published at:
नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा: 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य, EFTA डील बनी बड़ी वजह
Overview

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे की यात्रा पर हैं, जहां उनका मुख्य लक्ष्य दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड से पूंजी जुटाना है। नए EFTA समझौते का फायदा उठाते हुए, भारत अगले 15 सालों में **$100 बिलियन** का निवेश आकर्षित करने और **10 लाख** नई नौकरियां पैदा करने की उम्मीद कर रहा है।

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नॉर्वे का बढ़ता वित्तीय प्रभाव

वैसे तो भारत और नॉर्वे के बीच सीधा व्यापार बहुत ज़्यादा नहीं है, लेकिन भारत में नॉर्वे की वित्तीय उपस्थिति काफी बढ़ी है। इसका मुख्य कारण 'गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल' (Government Pension Fund Global) है, जो दुनिया का सबसे बड़ा सॉवरेन वेल्थ फंड है। साल 2016 के बाद से भारत में नॉर्वे की फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (Foreign Portfolio Investments) में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। अब यह 3.87% तक पहुंच गया है, जिससे नॉर्वे भारत का सातवां सबसे बड़ा निवेशक बन गया है। वहीं, नॉर्वे से होने वाले डायरेक्ट फॉरेन इन्वेस्टमेंट (FDI) के आंकड़े कम हैं, लेकिन 2020 के बाद से भारत ने नॉर्वे से करीब $693.1 मिलियन का FDI आकर्षित किया है।

EFTA समझौते से व्यापार और निवेश को बढ़ावा

भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। फाइनेंशियल ईयर 26 में भारत का नॉर्वे को एक्सपोर्ट $471.9 मिलियन रहा, जो फाइनेंशियल ईयर 25 के $425 मिलियन से ज़्यादा है। इसी अवधि में नॉर्वे से आयात $635.3 मिलियन रहा। हालांकि, भारत के कुल व्यापार में नॉर्वे की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है, जो विस्तार की काफी गुंजाइश दिखाती है।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक अहम फोकस भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच हाल ही में हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (Trade and Economic Partnership Agreement) पर है, जिसमें नॉर्वे भी शामिल है। इस समझौते से अगले 15 सालों में भारत में $100 बिलियन के निवेश की उम्मीद है और 10 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। नॉर्वे के सॉवरेन और पेंशन फंड से यह पैसा भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, एनर्जी ट्रांज़िशन पहलों और कैपिटल मार्केट के विकास में लगने की संभावना है।

रणनीतिक लक्ष्य और भविष्य का दृष्टिकोण

यह पहल भारत की विकास योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी जुटाने की रणनीति के अनुरूप है। EFTA समझौता आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है, जिसमें नॉर्वे के वित्तीय संसाधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर सरकार का ध्यान, आर्थिक विकास के प्रति एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो घरेलू विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी का लाभ उठा रहा है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.