Zee Entertainment ने Securities Appellate Tribunal (SAT) में याचिका दायर की है। कंपनी ₹76 करोड़ के वारंट सब्सक्रिप्शन पेमेंट के लिए एक दिन की मोहलत मांग रही है, क्योंकि यह राशि तय समय सीमा के बाद कंपनी के खातों में पहुंची थी।
पेमेंट में देरी का मामला
Zee Entertainment ने एक प्रोसीजरल बाधा को पार करने के लिए SAT का रुख किया है। कंपनी को Sunbright Mauritius Investments से ₹76 करोड़ का फंड मिलना था, जो 21 अगस्त, 2026 की डेडलाइन के बाद प्राप्त हुआ। अब कंपनी इस देरी को माफ करने और इसे स्वीकार करने के लिए ट्रिब्यूनल से गुहार लगा रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त, 2026 को तय की गई है।
प्रमोटर स्टेक और वारंट इश्यू
कंपनी अपनी प्रमोटर हिस्सेदारी को बढ़ाकर लगभग 24% तक ले जाने की कोशिश में है। इसके लिए करीब 20.94 करोड़ वारंट्स ₹126 प्रति शेयर की कीमत पर जारी किए गए थे। कंपनी पहले ही ₹659.76 करोड़ का 25% अपफ्रंट पेमेंट हासिल कर चुकी है, लेकिन यह आखिरी हिस्सा अब कानूनी पचड़े में फंस गया है।
फाइनेंशियल और रेगुलेटरी दबाव
कंपनी के हालिया जून तिमाही के आंकड़े चिंताजनक रहे हैं, जहाँ नेट प्रॉफिट में 48.3% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और रेवेन्यू ₹1,907.30 करोड़ रहा है। विज्ञापन बाजार में सुस्ती और स्पोर्ट्स राइट्स पर बढ़ते खर्चों ने मार्जिन पर काफी दबाव डाला है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और एसेट प्लेजिंग से जुड़े विवादों के कारण कंपनी लगातार रेगुलेटर्स की नजरों में है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वारंट्स के इक्विटी में बदलने पर शेयरों का डायल्यूशन (Dilution) हो सकता है, जिससे मौजूदा शेयरधारकों पर असर पड़ेगा।
