Wipro के 'Extended Bench Leave Programme' को लेकर पूर्व कर्मचारियों ने Labour Commissioner के पास शिकायत दर्ज कराई है। इस पॉलिसी के तहत बिलable प्रोजेक्ट न होने पर कर्मचारियों को **120** दिनों तक बिना वेतन के रखा जाता है, जो अब कानूनी जांच के घेरे में है।
Wipro की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कंपनी की 'Extended Bench Leave Programme' पॉलिसी अब श्रम विभाग की निगरानी में है। विवाद की मुख्य वजह यह है कि कंपनी का कहना है कि वे प्रोजेक्ट न होने की स्थिति में कर्मचारियों को केवल 45 दिन का पेड बेंच समय देते हैं, जिसके बाद उन्हें 'Extended Bench' पर जाना पड़ता है।
क्या है विवाद का कारण?
इस 120 दिनों की अवधि के दौरान, कंपनी न तो सैलरी देती है और न ही प्रोविडेंट फंड (PF) का योगदान जमा करती है। कर्मचारी को तभी वापस पेड स्टेटस पर लाया जाता है जब वह कम से कम 30 दिनों के लिए कोई नया बिलable प्रोजेक्ट हासिल कर ले। जो कर्मचारी ऐसा नहीं कर पाते, उन्हें कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
IT सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के लिए 'बेंच' मैनेजमेंट एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अक्सर कंपनियां इसके लिए ट्रेनिंग या रिशिलिंग का रास्ता चुनती हैं। Wipro की यह पॉलिसी अब एंप्लॉयर ब्रांडिंग और कानूनी अनुपालन (compliance) दोनों पर सवाल उठा रही है। यदि श्रम विभाग का फैसला कंपनी के खिलाफ जाता है, तो इससे न केवल ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है, बल्कि HR नीतियों में भी बड़े बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। निवेशकों को कंपनी के मैनेजमेंट की तरफ से आने वाले आधिकारिक बयानों और रेगुलेटरी अपडेट्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
