TVS Motor के चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से Tata Trusts के कामकाज की जांच की मांग की है। यह शिकायत नोएल टाटा की नियुक्ति और Tata Sons की कमर्शियल रणनीति में ट्रस्ट के दखल पर सवाल उठाती है। Tata Trusts के पास Tata Sons की **66%** हिस्सेदारी है, ऐसे में यह विवाद टाटा ग्रुप के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
TVS Motor के चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने औपचारिक रूप से महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' और 'सर रतन टाटा ट्रस्ट' के प्रशासनिक कामकाज की जांच करने की अपील की है। दोनों ट्रस्टों में ट्रस्टी के तौर पर कार्यरत श्रीनिवासन ने गवर्नेंस ट्रांसपेरेंसी और वर्तमान लीडरशिप स्ट्रक्चर पर गंभीर चिंता जताई है। यह घटनाक्रम सीधे तौर पर टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के आंतरिक कामकाज को रेगुलेटरी जांच के दायरे में ले आता है।
विवाद की जड़ क्या है?
विवाद का केंद्र Tata Trusts की ओर से Tata Sons की बिजनेस स्ट्रैटेजी में दखल देना है। ट्रस्ट्स के पास Tata Sons की 66% हिस्सेदारी है। श्रीनिवासन की याचिका में तर्क दिया गया है कि ट्रस्ट्स अपने चैरिटेबल दायरे से बाहर जाकर Tata Sons के कमर्शियल ऑपरेशन्स में सीधे हस्तक्षेप कर रहे हैं। शिकायत में लिक्विडिटी मैनेजमेंट और होल्डिंग कंपनी के स्तर पर संभावित लिस्टिंग के प्रस्तावों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
लीडरशिप और नियुक्तियों पर सवाल
श्रीनिवासन ने ट्रस्ट के नेतृत्व को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं, जिसमें नोएल टाटा की परपेचुअल ट्रस्टी (Perpetual Trustee) के रूप में नियुक्ति और चेयरमैनशिप की प्रक्रिया शामिल है। इसके अलावा, बोर्ड में नेविल टाटा को शामिल करने पर भी आपत्ति जताई गई है। साथ ही, कुछ ट्रस्टियों को महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया से जानबूझकर बाहर रखने का आरोप भी लगाया गया है।
टैक्स और रेगुलेटरी रिस्क
इस याचिका में सबसे बड़ा जोखिम ट्रस्ट के 'टैक्स-एग्जेंप्ट' (Tax-exempt) स्टेटस को लेकर है। यदि चैरिटी कमिश्नर यह पाते हैं कि ट्रस्ट धर्मार्थ संस्था के बजाय कमर्शियल इकाई की तरह काम कर रहे हैं, तो उनकी टैक्स छूट खतरे में पड़ सकती है। महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट, 1950 के तहत एसेट्स का इस्तेमाल केवल चैरिटेबल उद्देश्यों के लिए होना अनिवार्य है।
मार्केट पर असर
बाजार के नजरिए से देखें तो Tata Trusts का गवर्नेंस स्ट्रक्चर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह TCS, Tata Motors और Tata Steel जैसी दिग्गज कंपनियों पर नियंत्रण रखता है। हालांकि इन कंपनियों का रोजमर्रा का कामकाज स्वतंत्र है, लेकिन होल्डिंग लेवल पर होने वाली उथल-पुथल निवेशकों के मन में अनिश्चितता पैदा कर सकती है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि चैरिटी कमिश्नर इस याचिका पर क्या कदम उठाते हैं।
