Vedanta Iron & Steel अब Nifty 500 और Nifty Smallcap 250 जैसे प्रमुख इंडेक्स का हिस्सा बनने जा रही है। **30 सितंबर** से प्रभावी होने वाली यह लिस्टिंग कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, क्योंकि कंपनी **₹3,697 करोड़** के बड़े कैपेक्स प्लान के जरिए अपनी स्टील प्रोडक्शन क्षमता को **5 मिलियन टन** तक ले जाने की तैयारी कर रही है।
इंडेक्स में एंट्री से बढ़ेगी लिक्विडिटी
जून 2026 में Vedanta Limited से अलग होकर स्वतंत्र लिस्टिंग के बाद, अब कंपनी ने Nifty 500, Nifty Smallcap 250, Nifty MidSmallcap 400 और Nifty Smallcap 500 इंडेक्स में अपनी जगह पक्की कर ली है। इंडेक्स में शामिल होने का मतलब है कि अब पैसिव फंड्स और म्यूचुअल फंड्स का निवेश इस शेयर में बढ़ेगा, जिससे काउंटर पर वॉल्यूम और लिक्विडिटी में सुधार देखने को मिल सकता है।
₹3,697 करोड़ का मेगा एक्सपेंशन प्लान
कंपनी ने अपनी कैपेसिटी बढ़ाने के लिए आक्रामक रुख अपनाया है। कुल निवेश में से ₹2,975 करोड़ ESL यूनिट के विस्तार पर खर्च किए जाएंगे, जबकि ₹722 करोड़ गोवा में एक नए डक्टाइल आयरन पाइप प्रोजेक्ट के लिए आवंटित किए गए हैं। इन निवेशों का लक्ष्य वित्त वर्ष 2029 तक स्टील प्रोडक्शन क्षमता को मौजूदा 3 मिलियन टन से बढ़ाकर 5 मिलियन टन सालाना करना है।
माइनिंग और ऑपरेशनल अपडेट्स
मैनेजमेंट का पूरा फोकस अब प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने पर है। बोकारो विस्तार के लिए कंपनी ने स्टेज-I फॉरेस्ट क्लीयरेंस हासिल कर लिया है, जो पेलेट प्लांट और ब्लास्ट फर्नेस के लिए जरूरी था। साथ ही, कंपनी कर्नाटक में कुडनेम और जंतकल खदानों के साथ-साथ बिचोलिम आयरन ओर माइन्स में भी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
हालांकि कंपनी का विजन बड़ा है, लेकिन निवेशकों को कंपनी के कर्ज (Debt profile) पर नजर रखनी होगी। स्टील और माइनिंग जैसे सेक्टर काफी हद तक ग्लोबल कमोडिटी कीमतों पर निर्भर होते हैं। भविष्य में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी कितनी तेजी से इन बड़े प्रोजेक्ट्स को चालू करती है और इतने बड़े निवेश के बीच कैश फ्लो को कैसे मैनेज करती है।
