सुप्रीम कोर्ट ने Securities Appellate Tribunal (SAT) को आदेश दिया है कि वह Vedanta Ltd पर लगे **₹5.25 करोड़** के जुर्माने की दोबारा समीक्षा करे। यह मामला साल 2014 के शेयर बायबैक से जुड़ा है, जहां कंपनी अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने SEBI और Vedanta Ltd के बीच चल रहे पुराने कानूनी विवाद में नया मोड़ ला दिया है। यह मामला साल 2014 में कंपनी द्वारा किए गए शेयर बायबैक का है, जब यह कंपनी 'Cairn India' के नाम से जानी जाती थी।
क्या है विवाद?
साल 2014 में कंपनी ने ₹335 प्रति शेयर के भाव पर बायबैक की घोषणा की थी। हालांकि, कंपनी केवल 21.48% शेयर ही वापस खरीद पाई, जबकि नियमों के मुताबिक इसे 50% का लक्ष्य हासिल करना जरूरी था। SEBI का आरोप है कि पर्याप्त मार्केट लिक्विडिटी होने के बावजूद कंपनी ने खरीदारी नहीं की, जिससे निवेशकों को गुमराह किया गया।
पहले क्या हुआ था?
अक्टूबर 2023 में SAT ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जुर्माना रद्द कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने तर्क दिया था कि उस समय बाजार में भारी उतार-चढ़ाव था, जिसके कारण शेयर का भाव ₹335 से ऊपर बना रहा, जिससे बायबैक अव्यावहारिक हो गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को दरकिनार करते हुए ट्रिब्यूनल से फिर से यह तय करने को कहा है कि कंपनी की विफलता बाजार के कारण थी या जानबूझकर की गई कोताही।
निवेशकों के लिए अन्य अहम अपडेट्स
कंपनी ने मई 2026 में अपना बड़ा 'फाइव-वे डीमर्जर' पूरा किया है। फिलहाल शेयर ₹272.75 के आसपास ट्रेड कर रहा है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हाल ही में कंपनी को अपनी सब्सिडियरी 'Talwandi Sabo Power Limited' को लेकर ₹127 करोड़ के जुर्माने का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, प्रमोटर ग्रुप ने अपनी 54.72% हिस्सेदारी को क्रेडिट एग्रीमेंट के तहत गिरवी (Encumbered) रखा है। अब बाजार की नजर SAT की आगामी सुनवाई पर टिकी है, जो कंपनी के रेगुलेटरी रिकॉर्ड के लिए काफी महत्वपूर्ण होगी।
