भारतीय टेलीकॉम कंपनियां अब मैनुअल ड्राइव टेस्ट को खत्म कर AI-आधारित नेटवर्क एनालिटिक्स लाने की मांग कर रही हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बदलाव की व्यवहार्यता जांचने के लिए एक कमेटी के गठन का प्रस्ताव दिया है।
भारत के टेलीकॉम सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आने की सुगबुगाहट है। अब तक Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) के नियमों के तहत, कंपनियों को मैनुअल ड्राइव टेस्ट करने पड़ते हैं, जिसमें कर्मचारी खुद अलग-अलग इलाकों में जाकर कॉल क्वालिटी और डेटा स्पीड की जांच करते हैं। अब भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया जैसी दिग्गज कंपनियां इसे पुराना मानकर AI-आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग पर जोर दे रही हैं।\n\nइस नई व्यवस्था को लेकर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक जॉइंट कमेटी बनाने की पहल की है, जो यह तय करेगी कि क्या डिजिटल मॉनिटरिंग को मैनुअल प्रोटोकॉल की जगह लाया जा सकता है। इससे न केवल कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च कम होगा, बल्कि उन्हें नेटवर्क का सटीक और बारीक डेटा भी मिल सकेगा।\n\nहालांकि, सरकार ने अभी भी सतर्क रुख अपनाया है। अधिकारियों का मानना है कि AI और प्रेडिक्टिव मॉडलिंग बेहतरीन हो सकते हैं, लेकिन वे जमीनी हकीकत, जैसे कि सिग्नल इंटरफेरेंस और इमारतों के बीच नेटवर्क की स्थिति को पूरी तरह नहीं पकड़ सकते। वर्तमान में नियमों का पालन न करने पर कंपनियों पर ₹10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।\n\nनिवेशकों के लिए यह बदलाव काफी मायने रखता है। अगर सरकार AI-आधारित हाइब्रिड मॉडल को मंजूरी देती है, तो कंपनियों की मैनपावर लागत में बड़ी कमी आ सकती है। आने वाले महीनों में इस कमेटी की रिपोर्ट पर सबकी निगाहें रहेंगी कि क्या वास्तव में फिजिकल ऑडिट की जगह AI ले पाएगा या नियम पहले की तरह ही सख्त बने रहेंगे।
