Tata Trusts के भीतर बड़ी हलचल मच गई है। चेयरमैन Noel Tata के एक मर्जर प्लान को वाइस-चेयरमैन Venu Srinivasan और Vijay Singh ने चुनौती दी है। यह पूरा मामला Tata Sons की लिस्टिंग और RBI की गाइडलाइंस से जुड़ा है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
क्या है पूरा विवाद?
Tata Trusts की आंतरिक गवर्नेंस में बड़ा टकराव सामने आया है। दरअसल, चेयरमैन Noel Tata ने Tata Electronics Systems Solutions और Tata Consulting Engineers को मुख्य होल्डिंग कंपनी Tata Sons में मर्ज करने का प्रस्ताव रखा था। इस पर Venu Srinivasan और Vijay Singh ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस बड़े फैसले के लिए बोर्ड की जरूरी मंजूरी नहीं ली गई।
RBI और IPO का क्या है कनेक्शन?
यह सारा विवाद Tata Sons की रेगुलेटरी स्थिति से जुड़ा है। 11 सितंबर, 2026 को RBI ने Tata Sons की NBFC कैटेगरी छोड़ने की अर्जी खारिज कर दी थी। नियमों के मुताबिक, 'अपर लेयर' NBFC होने के नाते कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। जानकारों का मानना है कि यह मर्जर प्लान दरअसल कंपनी की कैटेगरी बदलने और अनिवार्य IPO से बचने की एक रणनीति थी।
कानूनी दांव-पेच
मामला इतना बढ़ गया है कि वाइस-चेयरमैन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज करा दी है। वहीं, जवाब में Noel Tata और उनके बेटे Neville Tata ने चैरिटी कमिश्नर के पास 36 कैविएट (Caveats) दाखिल की हैं ताकि कोई भी एकतरफा आदेश उनके खिलाफ न जाए।
निवेशकों पर असर
Tata Sons का भविष्य Tata Trusts की स्थिरता पर टिका है। बोर्ड के अंदर चल रहे इस घमासान से IPO की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। फिलहाल मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रस्ट इस विवाद को सुलझा पाएगा या यह कानूनी उलझन लंबी खिंचेगी।
