महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) को Tata Sons में अपने प्रभाव से जुड़े आरोपों का जवाब देने के लिए **19 अक्टूबर 2026** तक की मोहलत दी है।
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) को कॉर्पोरेट हस्तक्षेप के आरोपों पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। यह विवाद ट्रस्ट के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों से जुड़ा है। निवेशकों के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि Tata Trusts का Tata Sons में लगभग 66% स्टेक (हक) है।
विवाद की जड़
आरोप है कि ट्रस्ट ने अपनी सीमा से बाहर जाकर Tata Sons के कमर्शियल कामकाज में दखल दिया है। शिकायतकर्ताओं का मानना है कि इस दखलअंदाजी से न केवल ट्रस्ट का चैरिटेबल स्टेटस खतरे में पड़ सकता है, बल्कि बोर्ड के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की स्वायत्तता पर भी सवाल उठते हैं।
Tata Sons की लिस्टिंग और RBI के नियम
यह गवर्नेंस संकट ऐसे वक्त में सामने आया है जब ग्रुप एक बड़े स्ट्रैटेजिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। RBI के नियमों के मुताबिक, अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) के लिए पब्लिक लिस्टिंग अनिवार्य है। इस लिस्टिंग की प्रक्रिया को लेकर लीडरशिप के बीच मतभेद की खबरें हैं, जो बोर्ड की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
हालांकि इसका असर TCS या Tata Motors जैसे लिस्टेड शेयरों पर तुरंत नहीं पड़ता, लेकिन पैरेंट होल्डिंग कंपनी की स्थिरता में अनिश्चितता ग्रुप की रणनीतिक योजनाओं को धीमा कर सकती है। फिलहाल, बाजार की नजरें 19 अक्टूबर की डेडलाइन पर टिकी हैं कि क्या ट्रस्ट इस विवाद को शांत करने के लिए कोई ठोस जवाब दे पाएगा या यह कानूनी शिकंजा और गहरा होगा।
