Tata Steel को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी जीत मिली है। कोर्ट ने कंपनी पर लगाए गए **₹1,781 करोड़** के GST डिमांड और जुर्माने को रद्द कर दिया है। हालांकि, कंपनी के सामने अभी भी एक अन्य विवाद खड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने Tata Steel के पक्ष में फैसला सुनाते हुए टैक्स विभाग के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें ₹1,781 करोड़ के टैक्स और जुर्माने की मांग की गई थी। यह विवाद मुख्य रूप से फाइनेंशियल ईयर 2018-19 से 2020-21 के दौरान इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के गलत दावे से जुड़ा था।
कोर्ट का क्या कहना है?
जजों की बेंच ने स्पष्ट किया कि टैक्स अधिकारियों ने सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट की सेक्शन 74 का गलत इस्तेमाल किया। कानून के तहत, यह सेक्शन तभी लागू हो सकता है जब धोखाधड़ी या तथ्यों को छुपाने का पुख्ता सबूत हो। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी सिर्फ सामान्य दावों के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकते।
आगे क्या खतरा है?
भले ही कंपनी को फिलहाल बड़ी राहत मिली है, लेकिन यह मामला पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। कोर्ट ने टैक्स विभाग को यह छूट दी है कि यदि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं, तो वे 28 फरवरी, 2027 तक नए सिरे से कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।
दूसरा बड़ा कानूनी विवाद
निवेशकों के लिए सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि कंपनी पर एक और कानूनी तलवार लटकी है। ओडिशा सरकार द्वारा खनिज डिस्पैच (mineral dispatch) से जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में दोबारा शुरू हुआ है, जिसमें विवादित राशि ₹4,313.61 करोड़ है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर, 2026 को होनी है। मार्केट की नजरें अब टैक्स विभाग के अगले कदम और इस खनिज विवाद के नतीजों पर टिकी रहेंगी।
